एग्रीवेट: Diethylene Glycol Ban UP: उत्तर प्रदेश में दूध, दूध से बने सामान और मिठाइयों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कुछ नए नियम लागू किए हैं. दूध की प्रोसेसिंग करने वाली यूनिट में एथिलीन ग्लाइकोल और डायएथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. वहीं, 15 अक्टूबर से दुकानों और दूसरी जगहों पर बिकने वाली मिठाइयों पर ‘यूज बाय डेट’ यानी मिठाई को कब तक खाया जा सकता है, इसकी जानकारी देना जरूरी होगा. इन दोनों फैसलों का मकसद लोगों को सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का खाद्य सामान उपलब्ध कराना है.
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के मुताबिक, कुछ दूध रोसेसिंग यूनिट में दूध को तैयार करते समय मशीनों को ठंडा रखने के लिए एथिलीन ग्लाइकोल और डायएथिलीन ग्लाइकोल नाम के केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा था. इन केमिकल का इस्तेमाल कूलेंट के तौर पर होता है. अगर मशीन में कहीं से लीकेज हो जाए तो ये केमिकल दूध में मिल सकते हैं. इसी खतरे को देखते हुए विभाग ने इन दोनों केमिकल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. अगर ये केमिकल दूध या किसी दूसरे खाने-पीने के सामान में मिल जाएं तो सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है.
विभाग ने दूध प्रोसेसिंग यूनिट को कूलेंट के लिए दूसरे विकल्प अपनाने की सलाह दी है. इसके लिए प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया जा सकता है. विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कई दूध प्रोसेसिंग यूनिट में पहले से ही प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल हो रहा है. यानी जिन यूनिट को मशीनों और उपकरणों को ठंडा रखने के लिए कूलेंट की जरूरत होती है, वे प्रतिबंधित रसायनों की जगह प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल कर सकती हैं.
उत्तर प्रदेश में दूध एवं दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण में एथिलीन ग्लाइकोल (Ethylene Glycol) और डायएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है।
दूध के बाद अब मिठाइयों को लेकर भी विभाग ने बड़ा बदलाव किया है. उत्तर प्रदेश में दुकानों और दूसरी जगहों पर बिक्री के लिए रखी जाने वाली मिठाइयों पर अब ‘यूज बाय डेट’ यानी मिठाई को किस तारीख तक खाना ठीक रहेगा, इसकी जानकारी देना जरूरी होगा. यह नियम 15 अक्टूबर से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. खास बात यह है कि यह नियम खुली मिठाइयों पर भी लागू होगा. यानी मिठाई खरीदते समय ग्राहक को पता चल सकेगा कि उसे कितने समय के अंदर खा लेना चाहिए.
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने मिठाई बनाने और बेचने वाली दुकानों का निरीक्षण किया था. इस दौरान कई जगह यह सामने आया कि मिठाइयों के बनने की तारीख और उन्हें कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है, इसकी जानकारी ग्राहकों को साफ तौर पर नहीं दी जा रही थी. इस वजह से ग्राहक के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि मिठाई कितनी पुरानी है और उसे खरीदने के बाद कितने समय तक खाया जा सकता है. नई व्यवस्था से इस तरह की परेशानी कम होने की उम्मीद है.
विभाग के मुताबिक, हर मिठाई जल्दी खराब नहीं होती. कौन-सी मिठाई कितने दिन तक ठीक रहेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस तरह की है और उसे कैसे बनाया गया है. कुछ मिठाइयां बनाने के बाद सिर्फ एक दिन तक ही खाई जा सकती हैं, जबकि कुछ मिठाइयां 30 दिन तक भी ठीक रह सकती हैं. ज्यादा दिन बीतने पर मिठाई का स्वाद और ताजगी कम होने लगती है. इसलिए अब मिठाई खरीदते समय ‘यूज बाय डेट’ देखना जरूरी होगा, ताकि ग्राहक को पता रहे कि मिठाई कब तक खानी है.
पैकेज्ड मिठाइयों और दूसरे पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर एक्सपायरी डेट या ‘यूज बाय डेट’ बताने का नियम पहले से लागू है. लेकिन खुली मिठाइयों के मामले में यह जानकारी साफ तौर पर देना अनिवार्य नहीं था. अब नई व्यवस्था के बाद खुली मिठाइयों को लेकर भी ग्राहकों को यह जानकारी मिल सकेगी. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि इससे मिठाई कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहक खरीदारी करते समय ज्यादा आसानी से तय कर सकेंगे कि कौन सी मिठाई कब तक खानी है.