एग्रीवेट: Millets Farming: मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के साथ अब इनके कारोबार से जुड़ने का भी मौका दिया जा रहा है. बिहार सरकार मिलेट्स की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने वाले किसानों, उद्यमियों और दूसरी पात्र संस्थाओं को आर्थिक मदद देगी. इसके तहत यूनिट लगाने पर अधिकतम 5.40 लाख रुपये तक का अनुदान मिल सकता है. सरकार का मकसद गांव और स्थानीय स्तर पर मिलेट्स की प्रोसेसिंग को बढ़ाना है, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सके और रोजगार के नए मौके भी बनें.
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सामान्य वर्ग के आवेदकों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत या अधिकतम 4.32 लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी. वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 5.40 लाख रुपये तक अनुदान मिलेगा.
इस योजना का लाभ लेने के लिए एफपीओ, उद्यमी, व्यक्तिगत आवेदक और अन्य पात्र पंजीकृत संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं. योजना के तहत मिलेट्स की प्रोसेसिंग से जुड़ी मशीनरी खरीदने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी. प्रोसेसिंग यूनिट की क्षमता 100 से 200 किलोग्राम प्रति घंटा निर्धारित की गई है. इससे स्थानीय स्तर पर मोटे अनाज की सफाई, प्रोसेसिंग और आगे की बिक्री का काम शुरू किया जा सकता है. योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 8 सितंबर 2026 से हो चुकी है.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के मुताबिक राज्य सरकार मिलेट्स की खेती और उसकी प्रोसेसिंग को बढ़ाने के लिए किसानों और उद्यमियों को जरूरी सहयोग दे रही है. प्रोसेसिंग यूनिट लगने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके बढ़ेंगे और किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम पाने में मदद मिल सकती है.
योजना के तहत जमीन खरीदने, बिजली कनेक्शन, मानव संसाधन और दूसरे सामान्य संचालन खर्चों पर अनुदान नहीं दिया जाएगा. प्रोसेसिंग यूनिट को कम से कम तीन साल तक चलाना भी जरूरी होगा.
सरकार के मुताबिक, अनुदान का पैसा डीबीटी यानी सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाएगा. मशीन किसान को ओएसपीएमएस पोर्टल पर दिए गए विक्रेताओं में से ही खरीदनी होगी. इससे मशीन खरीदने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी.