धान कटाई के बीच सरकार का बड़ा एक्शन, पंजाब-हरियाणा में बढ़ी निगरानी.. फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात – एग्रीवेट

Team Agrivate
5 Min Read

एग्रीवेट: Stubble Burning: धान की कटाई शुरू होते ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने की तैयारी तेज हो गई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा में निगरानी बढ़ा दी है. इसके तहत दोनों राज्यों के 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की गई है. ये टीमें खेतों में जाकर पराली जलाने की स्थिति देखेंगी और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर इसे रोकने के लिए कदम उठाएंगी. निगरानी का यह अभियान 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा.

CAQM के निर्देश पर पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों को निगरानी के लिए चुना गया है. इन इलाकों में धान की खेती बड़े स्तर पर होती है और कटाई के समय पराली जलाने की घटनाएं सामने आती हैं. पंजाब में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं. वहीं हरियाणा में जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, सोनीपत, रोहतक, सिरसा, करनाल, पलवल, झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, पानीपत और हांसी में फ्लाइंग स्क्वॉड निगरानी करेंगे.

फ्लाइंग स्क्वॉड सिर्फ पराली जलाने की घटनाओं की जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि जमीनी स्थिति की भी जांच करेंगी. टीमें किसानों, पराली संरक्षण बल, जिला प्रशासन, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगी. अगर किसी इलाके में पराली जलाने की घटना सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल कर उसे रोकने की कोशिश की जाएगी. इसका मकसद खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर समय रहते नजर रखना है.

सीएक्यूएम ने पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती के साथ क्षेत्र-स्तरीय निगरानी तेज कर दी है।

अधिक जानकारी के लिए, यहां जाएं:

फ्लाइंग स्क्वॉड अपने-अपने इलाकों की रोजाना रिपोर्ट CAQM को भेजेंगी. इसमें खेतों की स्थिति, पराली जलाने की घटनाएं और उन्हें रोकने के लिए किए गए कदमों की जानकारी शामिल होगी. रोजाना रिपोर्ट मिलने से आयोग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर है और कहां अतिरिक्त निगरानी या कार्रवाई की जरूरत है.

फ्लाइंग स्क्वॉड को अलग-अलग चरणों में जिलों की जिम्मेदारी दी गई है. इसका मकसद धान की कटाई के पूरे सीजन में निगरानी बनाए रखना है. यानी 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक अलग-अलग समय पर टीमें खेतों और प्रमुख इलाकों की स्थिति पर नजर रखेंगी. CAQM का जोर सिर्फ निगरानी पर ही नहीं, बल्कि राज्यों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल पर भी है. आयोग ने पंजाब और हरियाणा सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से मिलकर काम करने को कहा है.

पराली जलाने की घटनाओं को कम करने में किसानों की भूमिका भी अहम है. धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को जलाने के बजाय उसके दूसरे इस्तेमाल और प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है. CAQM ने संबंधित एजेंसियों के साथ किसानों के सहयोग को भी जरूरी बताया है. आने वाले करीब दो महीनों में फ्लाइंग स्क्वॉड की निगरानी और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई से यह देखने वाली बात होगी कि खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर कितना नियंत्रण हो पाता है.

Share This Article