12 लाख टन धान की खरीद नहीं.. 70 फीसदी उपज मंडियों में लावारिस, ऐसे तो बर्बाद हो जाएंगे किसान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: हरियाणा में धान खरीद को लेकर सियासत तेज हो गई है. एक ओर सीएम नायब सैनी ने अधिकारियों को तुरंत धान खरीद करने के निर्देश दिए हैं तो वहीं किसान नेता मंडियों में धान खरीद कराने के लिए धरने पर बैठे हैं. अब पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने नायब सैनी सरकार पर किसानों को बर्बाद करने की साजिश करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है. उन्होंने कहा मंडियों में 12 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान खरीद के इंतजार में पड़ा है. लेकिन, सरकार किसानों की सुन तक नहीं रही है. उन्होंने कहा कि वे खुद कई मंडियों में जाकर खराब हालात देख चुके हैं.

हरियाणा सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए राज्य में 58 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का शुरुआती टारगेट तय किया है. 29 सितंबर से धान खरीद शुरू करने के आदेशों के बावजूद अब तक किसानों की धान खरीदी नहीं जा रही है और मंडियों में धान पड़ी हुई है. किसान संगठनों का कहना है कि सरकार मिलर्स के आगे झुकी है. किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि सोनीपत की अनाज मंडी में धान खरीद शुरू नहीं होने पर उन्हें धरने पर बैठना पड़ा. इसके बाद प्रशासन ने पीआर धान की MSP पर खरीद प्रक्रिया शुरू की. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान धरना दें, परेशान हों उसके बाद ही खरीद करेगी.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा की मंडियों में किसानों का बहुत बुरा हाल है. धान और बाजरा सड़कों पर पड़ा है, लेकिन सरकार खरीद नहीं रही है. 12 लाख मीट्रिक टन धान की आवक मंडियों में पहुंच चुकी है. आज मंडियां भरी पड़ी हैं, प्रदेश में खरीद सिर्फ 30 फीसदी हुई है और उठान मात्र 17 फीसदी हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बर्बाद करने के इरादे से काम कर रही है.

भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि ​मैंने खुद मंडियों में अपनी आंखों से देखा है कि नमी मापने के नाम पर किसानों के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है. एक ही धान की ढेरी का मॉइश्चर कोई मशीन 24 फीसदी बताती है, तो कोई 19 फीसदी और कोई 17 फीसदी बता रही है. यह सब किसानों को MSP न देने के बहाने हैं और उन्हें औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर करने की साजिश है. किसानों ने खुद बताया कि MSP न मिलने की वजह से उन्हें 400 रुपये प्रति क्विंटल तक कम रेट पर अपनी धान और 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर अपना बाजरा बेचना पड़ रहा है.

विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार का यह रवैया पूरी तरह किसान विरोधी है. उन्होंने कहा कि ​कांग्रेस के समय में किसान जैसे ही फसल लेकर मंडी आता था, तुरंत खरीद और उठान हो जाता था. हमारी मांग है कि सरकार तुरंत खरीद शुरू करे, फसल का उठान सुनिश्चित कराए और किसानों का जल्द भुगतान करे. उन्होंने नायब सैनी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस अनदेखी पर किसान और कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी. किसानों की लड़ाई सड़क पर उतरकर लड़ने के लिए मजबूर न किया जाए.

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