पराली जलाने के मामले में नया हॉटस्पॉट बना मध्य प्रदेश, पंजाब-हरियाणा को भी पीछे छोड़ा, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: दिल्ली-एनसीआर में ठंड के मौसम में होने वाले प्रदूषण के लिए सालों से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार माना जाता रहा है. लेकिन अब स्थिति बदल रही है. उत्तर भारत के इन दोनों राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी आई है, जबकि मध्य प्रदेश अब इस मामले में एक नया हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है. मध्य प्रदेश में 2024 और 2025 दोनों सालों में पंजाब और हरियाणा से ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं. साल 2025 में मध्य प्रदेश में धान की पराली जलाने के 17,067 मामले सामने आए, जो पंजाब के 5,114 मामलों से तीन गुना से भी ज्यादा हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि मध्य प्रदेश के किसानों ने अचानक ज्यादा पराली जलाना शुरू कर दिया है. राज्य में पराली जलाने की संख्या पिछले कुछ वर्षों से लगभग एक समान ही बनी हुई है. लेकिन पंजाब और हरियाणा में मामलों में आई भारी गिरावट के कारण मध्य प्रदेश के आंकड़े अब ज्यादा प्रमुखता से सामने आ रहे हैं.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR-IARI) के सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब धान ही नहीं, बल्कि गेहूं की पराली (नरवाई) जलाना भी एक बड़ी चिंता बन गया है. राज्य में गेहूं की पराली जलाने के मामले 2022 से 2024 के बीच 27,759 से घटकर 13,665 रह गए थे. लेकिन इसके बाद इसमें भारी उछाल आया और यह संख्या 2025 में बढ़कर 34,429 और 2026 में रिकॉर्ड 39,165 तक पहुंच गई. 1 अप्रैल से 31 मई 2026 के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में पराली जलाने के कुल 68,259 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से आधी से ज्यादा (50 फीसदी से अधिक) घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश में सामने आईं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विदिशा, सिद्धार्थनगर, होशंगाबाद, रायसेन और उज्जैन राज्य में पराली जलाने के प्रमुख केंद्र (हॉटस्पॉट) बनकर उभरे हैं. पंजाब और हरियाणा की आग का असर हवा के रुख और मौसम के कारण सीधे दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर पड़ता है, जबकि मध्य प्रदेश में लगने वाली आग का दिल्ली के हवा स्तर पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना कम होती है. हालांकि, असली चिंता उन शहरों की है जो इन प्रभावित क्षेत्रों से उठने वाले धुएं की दिशा में आते हैं. राज्य के कृषि परिदृश्य में जिस तरह से पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, उससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मध्य प्रदेश भी जल्द ही अपने खुद के मौसमी धुंध (स्मॉग) के संकट से जूझेगा, और क्या मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत के अन्य शहर भी इसके प्रभाव में आएंगे.

मध्य प्रदेश एक प्रमुख कृषि प्रधान राज्य है और यहां धान का रकबा पंजाब की तुलना में दोगुने से भी अधिक है. राज्य में धान की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि बदलते मौसम के कारण उड़द और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलें अनिश्चित बारिश और बाढ़ की चपेट में आ रही हैं. नुकसान से बचने के लिए किसान तेजी से धान की ओर रुख कर रहे हैं, जो बेहतर पैदावार देता है. लेकिन धान का रकबा बढ़ने के साथ ही कटाई के बाद बचने वाले भूसे (पराली) के प्रबंधन की समस्या भी उतनी ही बड़ी चुनौती बनती जा रही है.

Share This Article