जल्द सस्ता होगा प्याज, कीमतों में आ सकती है गिरावट.. जानें महंगाई को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: आने वाले हफ्तों में प्याज की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है. एक्सपर्ट का कहना है कि खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने और पुरानी फसल का बचा हुआ स्टॉक बाजार में आने से प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी. इससे खुदरा कीमतों में राहत मिल सकती है. फिलहाल प्याज के दाम पिछले साल के मुकाबले करीब दोगुने हैं. ऐसे में त्योहारों से पहले कीमतें घटने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 10 अक्टूबर को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो रही. एक महीने पहले यह 53.10 रुपये प्रति किलो थी, जबकि पिछले साल इसी समय कीमत 26.65 रुपये प्रति किलो थी. वहीं, प्याज की औसत थोक कीमत 4,591 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो एक महीने में 2.4 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 123.3 फीसदी ज्यादा है. वहीं, व्यापारियों को उम्मीद है कि महाराष्ट्र और दूसरे प्याज उत्पादक राज्यों से नई फसल की आवक बढ़ने पर नवंबर तक बाजार में प्याज की उपलब्धता बेहतर होगी.

हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के विकास सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि कई मंडियों में खरीफ प्याज की आवक शुरू हो गई है. घरेलू बाजार में मांग कमजोर है और निर्यात भी बहुत कम है. सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुरानी फसल का पर्याप्त स्टॉक है, जिससे नवंबर के तीसरे सप्ताह तक मांग पूरी की जा सकती है. वहीं, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से प्याज की आपूर्ति नवंबर के अंत तक जारी रहने की उम्मीद है. महाराष्ट्र में खरीफ की शुरुआती फसल भी अक्टूबर के अंत तक कम मात्रा में मंडियों में पहुंचने लगेगी. विकास सिंह के मुताबिक, महाराष्ट्र में खरीफ की शुरुआती प्याज फसल का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों अच्छे रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि राजस्थान के अलवर क्षेत्र से भी प्याज की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है. इससे उत्तर भारत के बाजारों में महाराष्ट्र से आने वाले प्याज पर निर्भरता कम होगी और उपलब्धता बेहतर हो सकती है.

प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री तेज कर दी है. केंद्र सरकार ने 7 अक्टूबर को बताया कि प्याज की बिक्री का दायरा बढ़ाकर 123 शहरों तक कर दिया गया है. सरकार के मुताबिक, इस साल खरीफ सीजन में प्याज की खेती का रकबा पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा रहने का अनुमान है. हालांकि, थोक बाजार में प्याज की कीमतें घटने का असर खुदरा बाजार में अभी ज्यादा नहीं दिख रहा है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक महीने में प्याज की औसत खुदरा कीमत में सिर्फ 0.2 फीसदी की गिरावट आई है. ऐसे में आम लोगों को प्याज के दाम में अभी बड़ी राहत नहीं मिली है.

HnyB के संस्थापक दीपक पारीक ने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि प्याज की कीमतों को स्थिर रखने की सरकार की नीति असरदार साबित नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि चुनिंदा केंद्रों पर 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेचने से लोगों को सीमित राहत मिल सकती है, लेकिन इससे पूरे बाजार की कीमतों पर खास असर नहीं पड़ेगा. पारीक के मुताबिक, भारत में हर दिन करीब 50 हजार टन प्याज की खपत होती है. ऐसे में कुछ बड़े शहरों में चुनिंदा केंद्रों के जरिए कुछ हजार टन प्याज बेचने से मांग और आपूर्ति का अंतर दूर नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि जब तक खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने से पहले थोक बाजार में प्याज की आपूर्ति बेहतर नहीं होती, तब तक सरकारी केंद्रों पर सीमित बिक्री से खुदरा बाजार में 50 से 70 रुपये किलो तक बिक रहे प्याज के दाम घटाना मुश्किल होगा.

Share This Article