भूटान को भारत का अनोखा तोहफा! जयशंकर ने सौंपीं 43 जर्सी गायें, 40 हजार किसानों को मिलेगा फायदा – एग्रीवेट

Team Agrivate
5 Min Read

एग्रीवेट: भारत और भूटान के रिश्तों में खेती और पशुपालन से जुड़ी साझेदारी का एक नया अध्याय जुड़ा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) ने भूटान के बूमथांग दौरे के दौरान भारत की ओर से 43 शुद्ध नस्ल की जर्सी गायें सौंपीं. इन गायों को भूटान के डेयरी कार्यक्रम को मजबूत करने और स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है. जयशंकर ने नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर का दौरा कर यह सहायता सौंपी. उन्होंने बताया कि इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों को सहारा देने में मदद मिलेगी. यह पहल करीब 40 हजार किसानों तक पहुंचने वाले कार्यक्रम से जुड़ी है.

दूध उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी मदद

भूटान में डेयरी सेक्टर  को मजबूत करने के लिए भारत की ओर से दी गई 43 शुद्ध जर्सी गायें महत्वपूर्ण हैं. जर्सी नस्ल की गायें अपने अच्छे दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. ऐसे में इन गायों के जरिए भूटान में डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर पशुधन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है. जयशंकर ने नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में कहा कि भारत से आई ये गायें दूध उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय किसानों को समर्थन देने में मदद करेंगी. इस कार्यक्रम से करीब 40 हजार किसानों को लाभ पहुंचाने की बात कही गई है.

भारत-भूटान की कृषि साझेदारी को बढ़ावा

भारत और भूटान  के बीच संबंध सिर्फ व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच विकास सहयोग में कृषि, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-भूटान संबंधों में विकास सहयोग एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. ऐसे में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी यह पहल दोनों देशों के बीच जमीनी स्तर की साझेदारी को मजबूत करने वाली पहल के रूप में सामने आई है.

भारत भूटान संबंध.

वांगदुएछोलिंग पैलेस और कुर्जे ल्हाखांग पहुंचे जयशंकर

अपने भूटान दौरे के दौरान जयशंकर ने बूमथांग में वांगदुएछोलिंग पैलेस और म्यूजियम का दौरा  किया. इसके अलावा उन्होंने कुर्जे ल्हाखांग में प्रार्थना भी की. यह दौरा 16-17 सितंबर को भूटान की उनकी आधिकारिक यात्रा का हिस्सा है. यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और स्वास्थ्य से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा और परियोजनाओं से संबंधित गतिविधियां हुईं.

भारत ने भूटान को दीं 43 जर्सी गायें

क्यों खास है 43 गायों का यह तोहफा?

भारत की ओर से 43 शुद्ध जर्सी गायें  देना केवल एक प्रतीकात्मक उपहार नहीं है, बल्कि भूटान के डेयरी क्षेत्र और स्थानीय किसानों को सीधे मदद पहुंचाने वाली पहल है. इसका उद्देश्य बेहतर नस्ल के पशुधन के जरिए दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों को पशुपालन से अधिक लाभ कमाने के अवसर देना है. भूटान में डेयरी कार्यक्रम को मजबूत करने के साथ यह सहयोग दोनों देशों के बीच कृषि और ग्रामीण विकास की साझेदारी को भी आगे बढ़ाता है. भारत-भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विकास सहयोग में इस तरह की पहल स्थानीय स्तर पर लोगों को सीधे लाभ पहुंचाने का माध्यम बन रही है.

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *