एग्रीवेट: Mastitis in Cows and Buffalo: अचानक दूध कम होने से परेशान हैं तो सावधान! कई बार पशु के थन में होने वाला थनैला रोग बिना किसी साफ लक्षण के दूध उत्पादन घटा देता है. सबक्लिनिकल मास्टाइटिस में पशु सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके दूध उत्पादन में 10 से 30 फीसदी तक कमी आ सकती है. ऐसे में पशुपालकों के लिए समय रहते इस बीमारी को पहचानना और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, थनैला यानी मास्टाइटिस गाय, भैंस और बकरी के थनों में होने वाली जीवाणु जनित बीमारी है. इसमें बैक्टीरिया थन के छिद्रों के जरिए पशु के शरीर में प्रवेश करते हैं. क्लीनिकल मास्टाइटिस होने पर थन में सूजन, लालिमा और दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कई बार दूध का रंग भी बदलकर पीला या खून मिला हुआ नजर आ सकता है. हालांकि, इसका सबक्लिनिकल रूप ज्यादा चिंता का विषय है. इसमें थन पर सूजन या कोई अन्य स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता, लेकिन अंदर ही अंदर दूध उत्पादन कम होने लगता है. यही वजह है कि पशुपालक कई बार बीमारी को पहचान नहीं पाते और उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान होता रहता है.
थनैला से बचाव के लिए पशुशाला का फर्श साफ और सूखा रखना सबसे जरूरी है. दूध निकालने के बाद थनों की आयोडीन घोल से टीट डिपिंग करनी चाहिए. इससे थन के छिद्रों के आसपास मौजूद संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया का खतरा कम करने में मदद मिलती है. दूध निकालने के बाद पशु को करीब 30 से 40 मिनट तक बैठने नहीं देना चाहिए. इसके लिए उसे चारा या दाना दिया जा सकता है. दूध निकालते समय हमेशा हाथ की पांचों उंगलियों से पूर्ण हस्त विधि अपनानी चाहिए, ताकि थन के ऊतकों को नुकसान न पहुंचे.
अगर पशु के थन में सूजन, लालिमा, गर्माहट या दर्द दिखाई दे अथवा दूध के रंग और बनावट में बदलाव नजर आए तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से समय पर उपचार किया जा सकता है और दूध उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. शुरुआती सूजन में 50 ग्राम पिसी काली मिर्च, 200 ग्राम घी और चीनी का मिश्रण देने की सलाह भी बताई जाती है, लेकिन किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है. नियमित साफ-सफाई, सही तरीके से दूध निकालना और शुरुआती लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना ही थनैला से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.