एग्रीवेट: हरियाणा सरकार ने प्रति एकड़ धान खरीद लिमिट तय करने का फैसला वापस ले लिया है. राज्य सरकार की ओर से सभी डिप्टी कमिश्नरों और जिलों के उपज खरीद से जुड़े अधिकारियों को आदेश पत्र जारी किया गया है, जिसमें किसान के पास ज्यादा उपज होने पर उसकी खरीद करने के निर्देश दिए गए हैं. इस फैसले पर किसान संगठनों ने खुशी जताई है. बीकेयू शहीद भगत सिंह के नेता तेजवीर सिंह ने किसान इंडिया को बताया कि खरीद लिमिट तय करने का विरोध 20 दिनों से प्रदेशभर में चल रहा है. उन्होंने कहा कि वह किसानों के हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे और इसी तरह सरकार से मांगें पूरी करवाएंगे.
हरियाणा सरकार ने धान खरीद शुरू करने की घोषणा के वक्त जिलावार और प्रति एकड़ के हिसाब से उपज खरीद की लिमिट तय की थी. हरियाणा में खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान धान खरीद प्रति एकड़ 26.26 क्विंटल की सीमा (प्रति एकड़ लिमिट) तय की गई थी. जिसे अब हटाने का आदेश जारी किया गया है. आदेश पत्र में कहा गया कि भारत सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक हरियाणा सरकार ने KMS-2026-27 के लिए पिछले तीन सालों की औसत पैदावार के आधार पर जिलेवार धान की पैदावार की लिमिट तय की थी, इसका विरोध कर रहे किसानों के प्रतिनिधिमंडलों से बात की गई, जिसमें बताया गया है कि कुछ मामलों में धान की असल पैदावार तय पैदावार लिमिट से काफी ज्यादा है.
किसानों की चिंताओं और संबंधित डिपार्टमेंट से मिली रिक्वेस्ट पर ठीक से विचार करने के बाद सरकार यह साफ करती है कि जिन किसानों की असल धान की पैदावार तय लिमिट से ज्यादा है, वे संबंधित सेक्रेटरी, HSAMB को लिखकर रिक्वेस्ट कर सकते हैं. संबंधित सेक्रेटरी, HSAMB, ऐसे क्लेम को वेरिफिकेशन के लिए संबंधित रेवेन्यू अथॉरिटीज या एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट को भेजेंगे. इसके बाद एप्लीकेंट किसान के पिछले प्रोडक्शन और सेल रिकॉर्ड के आधार पर वेरीफिकेशन 48 घंटे के अंदर पूरा किया जाएगा. अगर ज्यादा पैदावार के क्लेम को रेवेन्यू या एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की अथॉरिटीज़ वेरिफाई करती हैं, तो धान की ज्यादा क्वांटिटी भी खरीदी जाएगी.
कृषि विभाग की ओर से डिप्टी कमिश्नरों समेत उपज खरीद से जुड़े अधिकारियों को जारी आदेश पत्र में कहा गया है कि किसानों की उपज खरीदी जाए और उन्हें परेशानी नहीं हो. सभी संबंधित अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया जाता है कि इन निर्देशों को पूरी तरह से लागू किया जाए ताकि किसानों को मंडियों में अपनी धान की उपज बेचने में कोई बेवजह की मुश्किल या परेशानी न हो. यह सभी संबंधित लोगों की जानकारी, सख्ती से पालन और जरूरी कार्रवाई के लिए जारी किया गया है.
भारतीय किसान यूनियन (BKU) शहीद भगत सिंह के नेता तेजवीर सिंह ने बताया कि यह फैसला किसानों के संघर्ष की बहुत बड़ी जीत को दिखाता है. धरने और कड़े विरोध के बाद सरकार द्वारा खरीद (procurement) का पत्र जारी करना और 26 क्विंटल प्रति एकड़ की कैपिंग (सीमा) को हटाना यह साबित करता है कि जब किसान एकजुट होकर अपनी जायज मांगों के लिए लड़ते हैं, तो सरकार को उनकी बात माननी ही पड़ती है. हालांकि, किसान संगठनों ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि सरकार 26 क्विंटल प्रति एकड़ को बढ़ाकर 32 क्विंटल कर दे.