एग्रीवेट: किसानों के लिए गोबर की खाद खेतों में जैविक पदार्थ बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने का एक उपयोगी विकल्प है. हालांकि, सामान्य तरीके से गोबर को अच्छी तरह सड़ाकर खाद बनाने में कई महीने लग सकते हैं. ऐसे में ट्राइकोडर्मा जैसे लाभकारी कवक आधारित उत्पादों का सही इस्तेमाल खाद तैयार करने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, गोबर की खाद बनाते समय नमी, हवा, तापमान और इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद की मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है. उचित प्रबंधन से खाद अपेक्षाकृत कम समय में तैयार की जा सकती है. आइए जानते हैं गोबर की खाद बनाने का तरीका, ट्राइकोडर्मा के उपयोग और इससे जुड़े जरूरी सावधानियों के बारे में.
ट्राइकोडर्मा एक लाभकारी कवक है, जिसकी कुछ प्रजातियों का इस्तेमाल कृषि में मिट्टी की सेहत सुधारने और पौधों को रोगों से बचाने के लिए किया जाता है. इसके कुछ प्रकार जैविक पदार्थों के विघटन में भी भूमिका निभा सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, गोबर की खाद तैयार करते समय जैविक पदार्थों के साथ उपयुक्त सूक्ष्मजीवों का इस्तेमाल विघटन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, ट्राइकोडर्मा का हर उत्पाद गोबर को तेजी से खाद में बदलने के लिए नहीं बना होता. इसलिए उत्पाद के लेबल पर दिए गए उपयोग और मात्रा संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए. खाद की गुणवत्ता केवल किसी एक उत्पाद पर नहीं, बल्कि गोबर की स्थिति और उसके प्रबंधन पर भी निर्भर करती है.
गोबर से अच्छी खाद तैयार करने के लिए ढेर में उचित नमी और हवा का पहुंचना जरूरी है. बहुत ज्यादा सूखा गोबर होने पर सूक्ष्मजीवों की गतिविधि धीमी पड़ सकती है, जबकि जरूरत से ज्यादा पानी भरने पर सड़न और दुर्गंध की समस्या बढ़ सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, गोबर को ऐसी जगह जमा करना चाहिए जहां बारिश का पानी सीधे न भर सके और नमी बनाए रखना आसान हो. ढेर को समय-समय पर पलटने से हवा का संचार बेहतर हो सकता है. यदि किसी उत्पाद के निर्देशों में गोबर के ढेर में छेद करके घोल डालने की सलाह दी गई है, तो उसी के अनुसार इसका इस्तेमाल करें. बिना उत्पाद की जानकारी के एक निश्चित मात्रा सभी प्रकार के गोबर पर लागू नहीं करनी चाहिए.
कुछ जैविक अपघटक उत्पादों के इस्तेमाल से गोबर के विघटन की प्रक्रिया तेज हो सकती है. हालांकि, खाद को 30 से 60 दिनों में पूरी तरह तैयार मान लेना हर परिस्थिति में सही नहीं है. इसमें गोबर की मात्रा, तापमान, नमी, हवा और इस्तेमाल किए गए सूक्ष्मजीव उत्पाद की प्रभावशीलता का असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, खाद तैयार होने की पहचान उसके रंग, बनावट और गंध से भी की जा सकती है. अच्छी तरह पकी खाद आमतौर पर भुरभुरी होती है और उसमें ताजे गोबर जैसी तेज गंध नहीं रहती. खेत में इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खाद पर्याप्त रूप से विघटित हो चुकी है. अधपकी खाद का इस्तेमाल करने से फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
ट्राइकोडर्मा की अलग-अलग प्रजातियों के काम और उपयोग में अंतर होता है. ट्राइकोडर्मा हर्जियानम सहित कुछ प्रजातियों का इस्तेमाल कृषि में पौधों की जड़ों से जुड़े रोगों के प्रबंधन के लिए किया जाता है. लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि हर उत्पाद गोबर की खाद की उर्वरता को 50 गुना बढ़ा देगा या थोड़ी खाद से कई गुना ज्यादा खेत में पोषक तत्वों की जरूरत पूरी हो जाएगी. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को जैविक खाद का इस्तेमाल मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत और उपलब्ध पोषक तत्वों के आधार पर करना चाहिए.