एग्रीवेट: हरियाणा की मंडियों में धान की आवक तेजी से बढ़ रही है. लेकिन मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद उतनी तेजी से नहीं हो पा रही है. ताजा कटाई वाली धान में नमी ज्यादा होने के कारण खरीद में दिक्कत आ रही है. इसके अलावा सक्रिय राइस मिलों की कमी और पिछले सीजन का धान स्टॉक अभी पूरी तरह नहीं उठने से भी खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इसके चलते किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. कुछ जगहों पर किसान मजबूरी में निजी व्यापारियों को कम दाम पर धान बेच रहे हैं.
हरियाणा में मंडियों में पहुंची धान की फसल में से अब तक करीब 45 फीसदी की ही सरकारी खरीद के लिए नीलामी हो पाई है. इससे किसानों को फसल बेचने में देरी का सामना करना पड़ रहा है. ई-खरीद पोर्टल के मंगलवार शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 22 जिलों के 249 खरीद केंद्रों पर 8.92 लाख मीट्रिक टन (LMT) धान पहुंच चुका था. इसमें से 4.02 LMT यानी करीब 45 फीसदी धान की नीलामी हो चुकी है. सरकारी खरीद एजेंसियां FCI, HAFED और HSWC इस खरीद प्रक्रिया में शामिल हैं.
कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा 1.76 LMT धान की नीलामी हुई है. यहां धान की जल्दी पकने वाली किस्म की वजह से किसान पहले खरीद शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं. आंकड़ों के मुताबिक, नीलाम की गई फसल में से करीब 2.76 LMT धान की खरीद सरकारी एजेंसियां कर चुकी हैं. फसल उठाने के बाद किसानों के खातों में करीब 41.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.
धान की सरकारी खरीद में देरी और मंडियों से फसल का उठान धीमा होने के कारण हरियाणा के कई इलाकों में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र में इसका ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. केंद्र सरकार ने 29 सितंबर से धान की MSP पर खरीद शुरू की थी. सामान्य धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. लेकिन किसानों और आढ़तियों का कहना है कि कई मंडियों में धान की आवक के मुकाबले खरीद की रफ्तार धीमी है. उत्तरी जिलों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है.
धान में 17 फीसदी तक नमी को ही तय मानकों के तहत स्वीकार किया जा रहा है. इससे ज्यादा नमी वाली फसल की खरीद नहीं हो रही है. ऐसे में किसानों को धान सुखाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में निजी खरीदारों को कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है. हरियाणा के करनाल जिले के नीलोखेड़ी के किसान प्रवीण कुमार ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि उन्होंने करीब 6 एकड़ की धान की फसल निजी व्यापारियों को 2,150 से 2,275 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेच दी. जबकि धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है. ज्यादा नमी और सरकारी खरीद के लिए अधिकृत राइस मिलर्स की कमी के कारण उन्हें कम दाम पर फसल बेचनी पड़ी.
किसानों के मुताबिक, सरकारी खरीद में कम संख्या में राइस मिलर्स के शामिल होने से परेशानी और बढ़ गई है. राज्य में करीब 1,400 राइस मिलर्स हैं, लेकिन अब तक करीब 500 मिलर्स ही सरकारी खरीद प्रक्रिया से जुड़े हैं. सरकार ने पिछले साल का धान स्टॉक लंबित रखने वाले मिलर्स को इस सीजन की खरीद में शामिल नहीं किया है. राइस मिलर्स का कहना है कि पिछले खरीद सीजन का बड़ी मात्रा में कस्टम-मिल्ड चावल अभी भी भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास लंबित है. मिलर्स के संगठनों के मुताबिक, करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन चावल का स्टॉक अभी बाकी है. मिलर्स ने मिलिंग, भंडारण और परिवहन के बकाया भुगतान को लेकर भी चिंता जताई है.