एग्रीवेट: Rajasthan Farmer ID: राजस्थान ने किसान आईडी बनाने के मामले में तय लक्ष्य को 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है. केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे पूरा करने के साथ राजस्थान उत्तर भारत का पहला और देश का छठा राज्य बन गया है. करीब 83 लाख किसान जन आधार के जरिए किसान आईडी से जुड़ चुके हैं, जबकि राज्य के कुल बोए गए क्षेत्र का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा अब इस डिजिटल पहचान के दायरे में आ गया है.
किसान आईडी केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक पहल का अहम हिस्सा है. इसके जरिए खेती से जुड़ी योजनाओं, खाद वितरण, फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर खरीद जैसी सेवाओं में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. राजस्थान में 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा हो चुका है. कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2015-16 की कृषि गणना में राज्य में कुल 76.54 लाख जोत दर्ज थीं. इस आधार पर किसान आईडी बनाने का काम 100 प्रतिशत लक्ष्य से आगे निकलकर 118 प्रतिशत तक पहुंच गया है. सरकार के अनुसार, किसान आईडी को आधार, जमीन के रिकॉर्ड और जन आधार से जोड़ा गया है.
राजस्थान में करीब 83 लाख किसान जन आधार के जरिए किसान आईडी से जुड़ चुके हैं. वहीं, राज्य के लगभग 99 प्रतिशत गांवों की जमीन की मैपिंग पूरी हो चुकी है. रबी सीजन 2025-26 के दौरान राज्य में 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे भी किया गया. इन प्रयासों के चलते प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा किसान आईडी के दायरे में आ चुका है. इसके अलावा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी किसान आईडी से जोड़ा गया है.
कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है और इसके आंकड़ों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है. किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी जमीन और फसल की जानकारी से लिंक किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होगी. साथ ही पात्र लाभार्थियों की पहचान आसान होगी. खाद-बीज वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा और एमएसपी खरीद जैसी सेवाओं में भी पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
जो पात्र किसान अभी तक किसान आईडी से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें जोड़ने के लिए 1 से 30 सितंबर तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है. इसके लिए कृषि पर्यवेक्षकों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है. अभियान के तहत पात्र किसानों की जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है. पीएम-किसान लाभार्थियों को भी इसकी सूचना देने और अलग-अलग स्तर पर जांच की व्यवस्था की गई है. सरकार का लक्ष्य है कि पात्र किसान डिजिटल व्यवस्था से जुड़ें और किसान आईडी के जरिए उन्हें कृषि योजनाओं और सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके.