बागवानों को बड़ा झटका! ओलावृष्टि से बचाव पर 90 फीसदी नहीं, अभी मिलेगी सिर्फ 50 फीसदी सब्सिडी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Jammu Kashmir Horticulture: जम्मू-कश्मीर के बागवानों के लिए ओलावृष्टि से फसल बचाने को लेकर फिलहाल राहत सीमित है. सेब और अन्य फलों के बागों में एंटी-हेल नेट लगाने पर सरकार 50 फीसदी सब्सिडी दे रही है, लेकिन इसे बढ़ाकर 90 फीसदी करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है. ऐसे में ओलावृष्टि वाले इलाकों के बागवानों को मौजूदा सहायता के तहत ही फसल सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे. सरकार ने यह स्थिति विधानसभा में स्पष्ट की है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बागवानों को मिशन  फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत एंटी-बर्ड और एंटी-हेल नेट लगाने के लिए 50 फीसदी वित्तीय सहायता दी जा रही है. एक लाभार्थी अधिकतम 10,000 वर्गमीटर क्षेत्र के लिए इस सहायता का लाभ ले सकता है. यदि बाग का क्षेत्र इससे कम है तो सब्सिडी उसी अनुपात में तय की जाती है. सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य ओलावृष्टि और खराब मौसम से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बागवानों को सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है.

सरकार ने विधानसभा में शोपियां जिले में पिछले वर्षों के नुकसान का आंकड़ा भी साझा किया. 2023-24 में जिले में ओलावृष्टि या खराब मौसम  से फसल नुकसान का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था. इसके बाद 2024-25 में 6,792 बागवानों की 2,209.75 हेक्टेयर बागवानी फसल प्रभावित हुई. इस नुकसान के लिए 98.83 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया. वहीं 2025-26 में 2,179 बागवानों की 589.40 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई और उन्हें 51.43 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओलावृष्टि या खराब मौसम से नुकसान होने के बाद बागवानी और राजस्व विभाग  की संयुक्त टीम मौके पर जाकर प्रभावित बागों का निरीक्षण करती है. निर्धारित नियमों के अनुसार नुकसान का आकलन करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है. इसके बाद रिपोर्ट जिला उपायुक्त को भेजी जाती है और SDRF/NDRF के तय नियमों के तहत राहत या मुआवजे पर विचार किया जाता है.

जम्मू-कश्मीर में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) अभी लागू नहीं हुई है. सरकार के अनुसार बीमा कंपनियों की पहचान के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है और खरीफ 2026 से योजना लागू करने की तैयारी है. सेब की फसल के लिए बीमा की शर्तें यानी टर्म शीट तैयार की जा चुकी है. इसमें ओलावृष्टि और हाई-डेंसिटी सेब के बागों को होने वाले नुकसान को शामिल करने पर भी काम किया गया है. हालांकि, संशोधित RWBCIS दिशानिर्देशों पर केंद्र स्तर पर प्रक्रिया जारी है.

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