एग्रीवेट: Mustard Sowing Tips: धान की कटाई के बाद अब किसान रबी सीजन की प्रमुख तिलहनी फसल सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. सरसों से अच्छी पैदावार लेने के लिए केवल समय पर बुवाई करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि खेत की तैयारी, बीज उपचार और मिट्टी की जांच पर भी ध्यान देना चाहिए. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए. इसके साथ ही अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालने और बीज का शोधन करने से फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर रखने में मदद मिलती है. वहीं, मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि खेती की लागत भी बेवजह न बढ़े.
सरसों की अच्छी फसल के लिए सबसे पहले खेत को तैयार करना जरूरी है. धान की कटाई के बाद खेत में दो से तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए. इससे मिट्टी भुरभुरी होती है और अगली फसल की बुवाई के लिए खेत बेहतर तरीके से तैयार होता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, गहरी जुताई के बाद खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है. खाद की मात्रा खेत की मिट्टी और उसकी स्थिति के अनुसार तय करनी चाहिए.
सुअर पालन से स्वरोजगार: ग्रामीण युवाओं के लिए आय बढ़ाने का अवसर, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट
सरसों की खेती में बीज उपचार की अहम भूमिका होती है. बिना उपचार किए बीज बोने से उसमें मौजूद रोगकारक अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए बुवाई से पहले बीज का शोधन करना जरूरी है. विशेषज्ञ के अनुसार, किसान सरसों के बीज का उपचार ट्राइकोडर्मा से कर सकते हैं. इससे बीज जनित रोगों का खतरा कम करने में मदद मिलती है. जरूरत पड़ने पर कार्बेन्डाजिम का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इसकी मात्रा करीब 2 से 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज रखी जा सकती है. हालांकि, किसी भी कृषि रसायन का इस्तेमाल करने से पहले उसके पैकेट पर दिए गए निर्देशों और कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए. ट्राइकोडर्मा और रासायनिक फफूंदनाशक को बिना सलाह एक साथ नहीं मिलाना चाहिए.
सरसों की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराना भी जरूरी है. इससे मिट्टी का पीएच मान और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलता है. मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान यह समझ सकते हैं कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और उसकी पूर्ति कैसे करनी है. सामान्य तौर पर 7 से कम पीएच वाली मिट्टी अम्लीय और 7 से अधिक पीएच वाली मिट्टी क्षारीय मानी जाती है. जांच के जरिए मिट्टी की वास्तविक स्थिति जानना आसान होता है. इससे खाद के सही इस्तेमाल की योजना बनाने में मदद मिलती है.
सरसों की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित पोषण जरूरी है. इस फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम के साथ अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है. हालांकि, बाजार में उपलब्ध माइक्रोन्यूट्रिएंट का इस्तेमाल बिना मिट्टी की जांच कराए नहीं करना चाहिए. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मिट्टी की जांच रिपोर्ट में जिस पोषक तत्व की कमी मिले, उसी के अनुसार खेत में खाद और पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना चाहिए. जरूरत से ज्यादा खाद या माइक्रोन्यूट्रिएंट डालने से खेती का खर्च बढ़ सकता है. इसलिए किसान खेत की जरूरत के मुताबिक संतुलित पोषण दें. सही खेत तैयारी, बीज शोधन और मिट्टी की जांच से सरसों की फसल की शुरुआत बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.