एग्रीवेट: हरियाणा में सड़कों पर घूम रहे निराश्रित मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार चार ‘गो-वन’ विकसित कर रही है. राज्यभर में करीब 70,000 गायें सड़कों पर घूम रही हैं. सरकार इन्हें सुरक्षित आश्रय देने के साथ गोशालाओं को चारा, शेड और परिवहन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा बीज निगम के चेयरमैन मोहन लाल कौशिक ने हरियाणा गो-सेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ग्राम पंचायतों को गोशालाओं के लिए कम से कम 10 एकड़ गोचर भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य गायों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करना है. सरकार का फोकस गोशालाओं की क्षमता बढ़ाने और निराश्रित मवेशियों को स्थायी आश्रय देने पर है.
सरकारी बयान के मुताबिक, हरियाणा में करीब 70,000 गायें फिलहाल सड़कों पर हैं. इन्हें गोशालाओं और गो-वन में रखने के लिए गो-सेवा आयोग, ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकाय मिलकर काम कर रहे हैं. महेंद्रगढ़ के भोजावास गांव में 89 एकड़ जमीन पर बन रहे गो-वन का काम अंतिम चरण में है. इसके अलावा पलवल के राजपुरा खादर, कैथल के भूना और करनाल के सांभली में भी गो-वन विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है.
राज्य में करीब 707 पंजीकृत गोशालाएं हैं, जिनमें लगभग 40,000 गायें रह रही हैं. बाकी मवेशियों को अतिरिक्त गोशालाओं में भेजने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस महीने 22 गोशालाएं शुरू की जाएंगी, जबकि 14 नई गोशालाएं खोलने की प्रक्रिया जारी है. पंजीकृत गोशालाओं को जल्द ई-रिक्शा भी दिए जाएंगे. घायल और बीमार गायों की मदद के लिए ‘गौ सेवा रथ’ का इस्तेमाल किया जाएगा.
गोशालाओं को चारा अनुदान देने के लिए पोर्टल खुला है और पंजीकृत गोशालाएं 14 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं. इस साल सरकार ने चारा अनुदान के लिए 300 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा 200 गोशालाओं में लोहे के शेड बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है. हर शेड के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी. पिछले साल 49 गोशालाओं में ऐसे शेड बनाए गए थे.
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में एक प्रयोगशाला स्थापित की गई है. अधिकारियों को हरियाणा के किसानों तक बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. गुजरात, उत्तराखंड और पंजाब में पहले से नस्ल सुधार पर काम किया जा चुका है. अब हरियाणा में भी इसी तरह के प्रयास किए जाएंगे.