एग्रीवेट: देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में कम बारिश और अल नीनो की स्थिति का असर आने वाले समय में गन्ने की फसल पर पड़ सकता है. इससे 2027-28 के चीनी सीजन में गन्ने की उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है. गन्ने की कम उपलब्धता से चीनी उत्पादन में भी कमी आ सकती है. हालांकि, गन्ने की उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच चीनी मिलों के मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है. इसकी वजह चीनी और इथेनॉल की बेहतर मांग के साथ चीनी की कीमतों में सुधार है.
अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेजी आई थी. इसके बाद सरकार के लगातार हस्तक्षेप से कीमतों में काफी गिरावट आई है. ब्रोकरेज फर्म एलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, पेराई सीजन खत्म होने और उत्तर प्रदेश में चुनाव के बाद चीनी की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सीजन 2026-27 में उत्पादन कम रहने की संभावना है. ऐसे में चीनी के स्टॉक को दोबारा बढ़ाने में समय लग सकता है. वहीं, 48 रुपये प्रति किलो से ज्यादा कीमत पर आयातित चीनी की बिक्री फायदेमंद हो सकती है.
एलारा सिक्योरिटीज के मुताबिक, शॉर्ट से मीडियम टर्म में चीनी क्षेत्र को लेकर स्थिति सकारात्मक बनी हुई है. हालांकि, असली चुनौती 2027-28 के चीनी सीजन में सामने आ सकती है. कम बारिश और अल नीनो के कारण गन्ने की उपलब्धता घटने से चीनी उत्पादन पर दबाव पड़ने की आशंका है. जुलाई और अगस्त में चीनी का बिक्री कोटा पिछले साल के मुकाबले करीब 22-23 लाख टन पर रहा. लेकिन अगस्त में चीनी के भाव अचानक बढ़ने के बाद सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सितंबर में बिक्री बढ़ाने का फैसला किया.
सितंबर में चीनी का बिक्री कोटा 12.5 फीसदी बढ़ाकर 26.5 लाख टन कर दिया गया. इससे दूसरी तिमाही में कुल बिक्री कोटा 71 लाख टन हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि से 4.4 फीसदी ज्यादा है. वहीं, इथेनॉल की मांग भी बढ़ी है. तेल कंपनियों ने 2025-26 के दौरान लगातार 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण बनाए रखा. इसके चलते जुलाई और अगस्त में उद्योग की इथेनॉल बिक्री मात्रा में कुल 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
चीनी के अच्छे भाव के कारण गन्ने के रस या बी-हेवी शीरे से इथेनॉल बनाने की संभावना कम हो गई है. मौजूदा कीमतों में चीनी मिलों के लिए गन्ने से ज्यादा से ज्यादा चीनी बनाना अधिक फायदेमंद रहेगा. ऐसे में उद्योग की ओर से इथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से सी-हेवी शीरे का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे चीनी का उत्पादन अधिकतम रखने में मदद मिलेगी और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहेगी.
चीनी सीजन 2026-27 में इथेनॉल मिश्रण के लिए गन्ने से मिलने वाले कच्चे माल की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट आने की संभावना है. यह हिस्सेदारी पिछले सीजन के 31 फीसदी से घटकर करीब 6 फीसदी रह सकती है. इसका मतलब है कि चीनी मिलें गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे की बजाय सी-हेवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर ज्यादा निर्भर रहेंगी.
ब्राजील में गन्ने की फसल को लेकर बढ़ी चिंता के बीच वैश्विक चीनी बाजार में मजबूती आई है. ब्राजील के मध्य-दक्षिण क्षेत्र में भारी बाढ़ के कारण गन्ने की कटाई प्रभावित हुई है. इस इलाके में आमतौर पर अप्रैल से नवंबर तक गन्ने की पेराई होती है. नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवारे ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि ब्राजील में गन्ने की कटाई प्रभावित होने से दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातक देश के उत्पादन में कमी की आशंका बढ़ी है. इससे वैश्विक बाजार में चीनी की सप्लाई घटने की चिंता बढ़ी है और कच्ची चीनी की कीमतों को सहारा मिला है.
NFCSF ने चीनी सीजन 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन करीब 290 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है. यह पिछले सीजन के 309 लाख टन उत्पादन से कम है. हालांकि, इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का डायवर्जन कम होने से उत्पादन में कमी का असर कुछ हद तक कम हो सकता है. इससे घरेलू खपत के लिए ज्यादा चीनी उपलब्ध रहेगी. फेडरेशन ने 2026-27 में घरेलू चीनी खपत करीब 285 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है. साथ ही, इस सीजन में चीनी के आयात या निर्यात की संभावना नहीं जताई गई है. सितंबर 2027 के अंत तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 42.53 लाख टन रहने का अनुमान है.