एग्रीवेट: Andhra Pradesh Drought: आंध्र प्रदेश में इस साल बारिश की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खरीफ 2026 सीजन में राज्य के 688 में से 388 मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है. इनमें 283 मंडलों को गंभीर और 105 को मध्यम सूखा प्रभावित माना गया है. राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया. यह फैसला सामान्य समय से पहले लिया गया है, क्योंकि बारिश की स्थिति लगातार खराब बनी हुई थी.
आंध्र प्रदेश में इस बार मॉनसून की स्थिति कमजोर रही. सरकारी आदेश के मुताबिक, 1 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच राज्य में औसतन 197.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 424.3 मिलीमीटर मानी जाती है. यानी राज्य में सामान्य के मुकाबले करीब 53.4 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. बारिश की इस भारी कमी के बीच अल नीनो की मौजूदा स्थिति ने सूखे की चिंता और बढ़ा दी. इन्हीं हालात को देखते हुए सरकार ने खरीफ सीजन में सूखे की घोषणा समय से पहले करने का फैसला लिया.
सूखे की घोषणा राज्य के 21 जिलों में की गई है. इनमें श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापत्तनम, अनकापल्ली, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, एलुरु, कृष्णा, एनटीआर, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, प्रकाशम, मार्कापुरम, कुरनूल, नंद्याल, अनंतपुरमु, श्री सत्य साई, वाईएसआर कडपा, अन्नमय्या और चित्तूर शामिल हैं. सरकार ने यह फैसला भारत सरकार के 2016 के सूखा प्रबंधन नियमों में दिए संकेतकों को ध्यान में रखकर लिया है. यानी बारिश की कमी के साथ सूखे से जुड़े दूसरे हालात को भी देखा गया.
बारिश की कमी का असर खास तौर पर रायलसीमा इलाके में ज्यादा दिखाई दे रहा है. पूर्व कृषि मंत्री कुरसाला कन्नबाबू और वाईएसआरसीपी के राज्य महासचिव गडिकोटा श्रीकांत रेड्डी ने सूखे की घोषणा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. कन्नबाबू के मुताबिक, सूखा घोषित किए गए 388 मंडलों में से 186 रायलसीमा क्षेत्र में हैं. वहीं गंभीर सूखे वाले 283 मंडलों में से 159 भी इसी इलाके में आते हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में बारिश की कमी का असर कितना ज्यादा है.
आमतौर पर खरीफ 2026 के सूखे की घोषणा के लिए 31 अक्टूबर तक इंतजार किया जा सकता था. लेकिन 30 सितंबर को हुई सूखे को लेकर बनी उच्चस्तरीय समिति की बैठक में 21 जिलों में समय से पहले सूखा घोषित करने की सिफारिश की गई. इसके अगले दिन राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने आदेश जारी कर दिया. इसका मकसद सूखे की स्थिति से प्रभावित इलाकों में राहत और जरूरी कदम जल्द शुरू करना बताया गया है.
राज्य में सूखे जैसे हालात के बीच मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी और कावेरी नदी प्रणालियों को जोड़ने की बात कही है. उन्होंने कहा कि नदियों के पानी का बेहतर इस्तेमाल दक्षिणी राज्यों को सूखे की समस्या से राहत दे सकता है. नायडू के मुताबिक, करीब 2,000 टीएमसी नदी का पानी समुद्र में चला जाता है. अगर इसमें से 200 टीएमसी गोदावरी का बाढ़ का पानी भी इस्तेमाल किया जाए तो रायलसीमा जैसे इलाकों में खेती और हरियाली को फायदा मिल सकता है.