एग्रीवेट: Maharashtra Drought 2026: महाराष्ट्र में बारिश की कमी के चलते सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है. राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका है. अब केंद्र सरकार की बहु-विभागीय टीम इन इलाकों का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लेगी. टीम 7-8 अक्टूबर के आसपास महाराष्ट्र पहुंच सकती है और 11 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. इस रिपोर्ट के आधार पर सूखे से प्रभावित लोगों और किसानों के लिए राहत से जुड़े कदमों पर फैसला हो सकता है.
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को बारिश की कमी को देखते हुए राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया था. यह राज्य के करीब 74 फीसदी तालुका हैं. अब केंद्र की टीम इन इलाकों में जाकर यह देखेगी कि सूखे का जमीन पर कितना असर पड़ा है.
केंद्रीय टीम की अगुवाई कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल करेंगे. इसमें वित्त और कृषि विभाग समेत 10 केंद्रीय विभागों और एजेंसियों के अधिकारी शामिल होंगे. टीम फसल, पानी और किसानों की स्थिति का जायजा लेकर आगे की राहत के लिए सुझाव देगी.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक, राज्य में करीब 23 हजार गांवों में फसल सर्वे का काम पूरा हो चुका है. इसके साथ ही जमीनी स्तर पर भी सर्वे जारी है. सरकार की कोशिश है कि यह काम जल्द पूरा हो, ताकि सूखे से हुए नुकसान की सही तस्वीर सामने आ सके और केंद्र से जरूरी मदद मांगी जा सके. कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने के मुताबिक, केंद्रीय टीम सूखे की गंभीरता का आकलन करेगी. इसके बाद किसानों और प्रभावित लोगों के लिए राहत, तुरंत उठाए जाने वाले कदम और आगे के पुनर्वास को लेकर सुझाव दिए जाएंगे.
सूखे की स्थिति में महाराष्ट्र सरकार ने पीने के पानी को सबसे पहली प्राथमिकता देने की बात कही है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, लोगों और पशुओं के लिए अगस्त 2027 तक पानी उपलब्ध रखने की तैयारी पर जोर दिया जाएगा. सरकार की योजना के मुताबिक, पहले घरेलू जरूरत और पशुओं के लिए पानी सुरक्षित रखा जाएगा. इसके बाद अगर पानी बचता है तो उसका इस्तेमाल उद्योग और खेती के लिए करने पर विचार किया जाएगा. सूखे की स्थिति में पानी की उपलब्धता किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है.
महाराष्ट्र सरकार ने सूखे से निपटने के लिए केंद्र से राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि यानी NDRF के तहत आर्थिक मदद मांगी है. कृषि मंत्री ने हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने भी किसानों से जुड़ी समस्याएं रखी थीं. अब केंद्रीय टीम के दौरे से राज्य सरकार को सूखे से हुए नुकसान का आकलन और राहत की जरूरत केंद्र के सामने रखने का मौका मिलेगा. टीम की रिपोर्ट के बाद किसानों, ग्रामीण परिवारों और प्रभावित इलाकों के लिए राहत और पुनर्वास से जुड़े कदमों पर आगे फैसला लिया जा सकता है.