एग्रीवेट: देश में प्याज की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 16 सितंबर को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.84 रुपये प्रति किलो रही. जबकि, एक महीने पहले 16 अगस्त को यह 35.85 रुपये किलो थी. यानी एक महीने में प्याज के दाम 50.18 फीसदी बढ़े हैं. वहीं, एक साल पहले की बात करें तो 16 सितंबर 2025 को प्याज की औसत खुदरा कीमत 27.71 किलो रुपये थी. यानी इसके मुकाबले इस साल कीमत 94.30 फीसदी ज्यादा है. थोक बाजार में भी प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं. 16 सितंबर को अखिल भारतीय औसत थोक कीमत 4,565.21 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि एक महीने पहले यह 2,851.99 रुपये प्रति क्विंटल थी. यानी थोक कीमत में एक महीने में 60.07 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सालाना आधार पर थोक कीमत 111.94 फीसदी बढ़ी है. वहीं, इसी अवधि में आलू की खुदरा कीमत 22.94 रुपये किलो और टमाटर की 38.96 रुपये किलो रही. ऐसे में आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों में प्याज की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं, उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बुधवार को कहा कि पिछले 9 दिनों के अंदर प्याज की कीमतों में कमी आई है. उन्होंने कहा है कि थोक बाजारों में प्याज की कीमतों में 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, होलसेल कीमतों में गिरावट का असर अभी खुदरा बाजार में नहीं दिख रहा है. लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी दिखेगा और प्याज के दाम कम हो सकते हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि देश में प्याज की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है. सरकार ने खुदरा स्तर पर प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने के लिए 48 शहरों तक सप्लाई पहुंचाई है. इसके लिए ट्रकों और अन्य परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया गया है. उन्होंने बताया कि पिछले 9 दिनों में मंडी कीमतों में 9 फीसदी की गिरावट आई है. इसका असर जल्द खुदरा कीमतों पर भी दिखने की उम्मीद है सरकार प्याज के बफर स्टॉक को जरूरत के हिसाब से बाजार में जारी कर रही है. इसके लिए रेलवे रेक, जिसमें ‘कांदा एक्सप्रेस’ भी शामिल है, और सड़क मार्ग से प्याज भेजा जा रहा है. प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री 24 अगस्त से NAFED और NCCF के जरिए शुरू की गई थी. इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिली है. केंद्र सरकार के पास फिलहाल 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है. साल 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहा, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन से थोड़ा कम है. आमतौर पर अगस्त-सितंबर में त्योहारों की मांग बढ़ने, मौसम खराब होने और सप्लाई में बदलाव के कारण प्याज के दाम बढ़ते हैं. मंगलवार को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.92 रुपये प्रति किलो रही. यह एक महीने पहले के मुकाबले 48 फीसदी और एक साल पहले की तुलना में 94 फीसदी अधिक है. वहीं, अगस्त में प्याज की महंगाई बढ़कर 48.27 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 22.54 फीसदी थी. लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचना शुरू किया. NCCF, NAFED और केंद्रीय भंडार के खुदरा केंद्रों के अलावा मोबाइल वैन के जरिए भी प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है.