एग्रीवेट: Indian Tuna Fish: टूना मछली में परजीवी मिलने की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद मछली खाने वाले लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. इस बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) ने इस मामले पर सफाई दी है. संस्थान के मुताबिक, भारतीय समुद्री तट के पास पकड़ी गई टूना मछलियों में किसी हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी लक्षण नहीं मिले हैं.
ऐसे में भारतीय तटों से मिलने वाली टूना मछली को सामान्य तौर पर स्वस्थ आहार का हिस्सा माना जा सकता है. संस्थान ने लोगों से यह भी कहा है कि किसी दूसरे देश या समुद्री क्षेत्र में मिली समस्या के आधार पर भारत में मिलने वाली टूना या दूसरी आम मछलियों को खाना बंद करने की जरूरत नहीं है.
दरअसल, टूना मछली में परजीवी मिलने की जिस रिपोर्ट के बाद चिंता बढ़ी, वह ब्राजील के पास अटलांटिक महासागर में पकड़ी गई स्किपजैक टूना मछलियों पर की गई एक स्टडी से जुड़ी थी. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, ICAR-CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज के मुताबिक, संस्थान के वैज्ञानिक समुद्री मछलियों पर नियमित रूप से रिसर्च करते हैं. इस दौरान मछलियों के शरीर, उनके विकास और दूसरी जैविक विशेषताओं की जांच की जाती है. जरूरत पड़ने पर परजीवी या किसी असामान्य स्थिति की भी जांच की जाती है. भारतीय तट से जांची गई टूना मछलियों में फिलहाल हानिकारक परजीवी संक्रमण के बाहरी संकेत नहीं पाए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्र के किसी एक हिस्से में मछलियों में पाए गए परजीवी की रिपोर्ट को दूसरे समुद्री क्षेत्र की मछलियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता. मछलियों में परजीवी की मौजूदगी कई चीजों पर निर्भर करती है. समुद्र का वातावरण, पानी की स्थिति और परजीवी के जीवन चक्र में मदद करने वाले दूसरे जीवों की उपलब्धता इसमें अहम भूमिका निभा सकती है. इसी वजह से अलग-अलग समुद्री इलाकों में एक ही प्रजाति की मछली में परजीवी की स्थिति अलग हो सकती है.
ICAR-CMFRI ने मछली खाने वालों को सफाई का खास ध्यान रखने की सलाह दी है. मछली को अच्छी तरह साफ करने के साथ उसके अंदरूनी अंगों को जल्द निकाल देना चाहिए. इससे मछली को साफ रखने और खाने से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलती है. खासकर ऐसी जगहों पर जहां कच्ची या कम पकी मछली खाने का चलन है, वहां अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है. अगर किसी इलाके में परजीवी संक्रमण ज्यादा हो और मछली की ठीक से जांच या सफाई न की गई हो, तो कच्ची या अधपकी मछली खाना जोखिम बढ़ा सकता है.
भारत में मछली को आमतौर पर अच्छी तरह पकाकर खाया जाता है. मछली को पर्याप्त तापमान पर पकाने से खाद्य सुरक्षा बेहतर होती है और संभावित परजीवी से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलती है. इसलिए किसी दूसरे समुद्री क्षेत्र में परजीवी मिलने की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय तटों से मिलने वाली टूना मछली को लेकर डरने की जरूरत नहीं है. हालांकि, मछली खरीदते समय उसकी ताजगी, सफाई और सही तरीके से पकाने का ध्यान रखना हमेशा जरूरी है.