एग्रीवेट: 63 हजार टन मूंग मंडियों में पहुंची, औसत भाव 7,452 रुपए क्विंटल; किसान बोले- समय पर सरकारी खरीद शुरू होती तो मिलता बेहतर मूल्य
26 सितंबर 2026, जयपुर: राजस्थान में मूंग की बंपर आवक, फिर भी किसानों को एमएसपी से कम दाम – राजस्थान में खरीफ मूंग की नई फसल की आवक तेज हो गई है, लेकिन किसानों को अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल पाने से चिंता बनी हुई है। खरीफ सीजन में देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य राजस्थान है। यहां 1 सितंबर से नई फसल की करीब 63 हजार टन मूंग मंडियों में पहुंच चुकी है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग दस गुना अधिक है।
1 से 18 सितंबर के बीच वर्ष 2025 में मूंग की आवक 6,451 टन और 2024 में 7,574 टन रही थी। इस वर्ष आवक में हुई तेज बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को औसतन 7,452 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिला, जबकि मूंग का एमएसपी 8,780 रुपए प्रति क्विंटल है। यानी किसानों को औसतन एमएसपी से करीब 15 प्रतिशत कम दाम प्राप्त हुआ।
एगमार्कनेट के आंकड़ों के अनुसार सितंबर की शुरुआत में अलग-अलग मंडियों में मूंग के औसत भाव करीब 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल थे। 17 सितंबर तक इनमें कुछ सुधार हुआ और औसत कीमत लगभग 7,960 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। इसके बावजूद यह भाव घोषित एमएसपी से नीचे रहा।
किसानों का कहना है कि नई फसल मंडियों में आने के साथ ही यदि सरकारी खरीद प्रभावी ढंग से शुरू हो जाती तो उन्हें अपनी उपज के बेहतर दाम मिल सकते थे।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 के खरीफ सीजन के लिए सरकार ने सभी खरीफ फसलों में मूंग के एमएसपी में सबसे कम, केवल 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने इस बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मूंग के एमएसपी में महज 12 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
उनका सुझाव है कि केंद्र सरकार खरीद से जुड़े नियमों में बदलाव करे। उनके अनुसार नेफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों को राज्यों के अनुरोध की प्रतीक्षा किए बिना खरीद शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है अथवा राज्यों को अपनी जरूरत के अनुसार खरीद की तारीख और मात्रा तय करने की स्वतंत्रता दी जा सकती है।
जाट के मुताबिक यदि एमएसपी पर खरीद समय पर शुरू होती तो किसानों की आय में उल्लेखनीय अंतर आ सकता था। वर्तमान बाजार भाव और एमएसपी के बीच किसानों को 1,280 से 3,200 रुपए प्रति क्विंटल तक का अंतर झेलना पड़ रहा है।
वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में राजस्थान में मूंग का उत्पादन 13.89 लाख टन रहा था, जो देश के कुल मूंग उत्पादन का करीब 72 प्रतिशत बताया गया है। राज्य सरकार ने मौजूदा खरीफ सीजन में मूंग की खेती के लिए 26.50 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया था।
इस वर्ष मूंग का वास्तविक रकबा 23.17 लाख हेक्टेयर रहा, जो निर्धारित लक्ष्य से लगभग 13 प्रतिशत कम है। वहीं मूंग के साथ राजस्थान की प्रमुख दलहनी फसल मोठ का रकबा भी लक्ष्य से कम रहा। मोठ के लिए 10 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जबकि इस वर्ष इसका रकबा 9.12 लाख हेक्टेयर रहा। हालांकि यह वर्ष 2025 के 8.59 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अधिक है।
मूंग की कीमतों पर बाजार में मौजूद पुराने स्टॉक का भी असर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार सहकारी एजेंसी नेफेड पिछले वर्षों की खरीदी गई मूंग को करीब 6,500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेच रही है। किसानों के प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे बाजार भाव पर दबाव बन रहा है और नई फसल के उत्पादकों को एमएसपी के आसपास दाम मिलने में परेशानी हो रही है।
किसान लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि नई मूंग की आवक को देखते हुए सरकारी खरीद 1 सितंबर से ही शुरू की जाए। किसानों का सवाल है कि यदि किसी क्षेत्र में फसल निर्धारित खरीद अवधि से पहले ही तैयार होकर मंडी पहुंच जाती है तो उत्पादक को सरकारी खरीद शुरू होने तक अपनी उपज रोककर रखने के लिए क्यों मजबूर होना पड़े।
मूंग की आवक और बाजार भाव के मौजूदा हालात ने एक बार फिर समय पर सरकारी खरीद, एमएसपी और किसानों को बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। आने वाले दिनों में सरकारी खरीद की गति और मंडियों में आवक यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि किसानों को अपनी उपज का कितना मूल्य मिल पाता है।