एग्रीवेट: Crossbreed Cow: डेयरी फार्मिंग शुरू करने वाले किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि शुरुआत सोच-समझकर की जाए. ज्यादा दूध के लालच में एक साथ बड़ी संख्या में गाय खरीदने या केवल किसी खास नस्ल के पीछे भागने से नुकसान हो सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (कृषि विज्ञान केंद्र, नोएडा) के अनुसार, नए किसान शुरुआत में क्रॉस ब्रीड की करीब 5 गायों से डेयरी शुरू कर सकते हैं. पहले कम से कम दो साल तक इस काम का अनुभव लेना चाहिए. इसके बाद पशुओं की संख्या बढ़ाना ज्यादा बेहतर रहेगा.
डेयरी फार्मिंग में मुनाफा केवल गायों की संख्या पर निर्भर नहीं करता. पशुओं की नस्ल, दूध उत्पादन, चारे का खर्च, स्वास्थ्य और देखभाल जैसे कई पहलू इसमें महत्वपूर्ण होते हैं. नए किसान अक्सर ज्यादा मुनाफे की उम्मीद में एक साथ कई गाय खरीद लेते हैं. अगर पशुओं की देखभाल और खर्च का सही प्रबंधन नहीं हो पाए तो नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, नए लोगों को छोटे स्तर से शुरुआत करनी चाहिए. करीब 5 गायों से फार्म शुरू करने पर किसान पशुओं की देखभाल, खान-पान, बीमारी और दूध उत्पादन को बेहतर तरीके से समझ सकता है.
डेयरी में नस्ल का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है. मौजूदा समय में कई किसान गीर और साहीवाल जैसी देसी नस्लों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. हालांकि, शुरुआत करने वाले किसानों को केवल नस्ल के नाम या ज्यादा दूध के दावे को देखकर पशु नहीं खरीदना चाहिए. विशेषज्ञ के अनुसार, शुरुआती स्तर पर क्रॉस ब्रीड गायों से डेयरी शुरू करना एक विकल्प हो सकता है. किसान करीब दो साल तक इसका अनुभव लेने के बाद अपने फार्म का विस्तार कर सकते हैं. इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके क्षेत्र में किस तरह के पशु, चारा और प्रबंधन से बेहतर परिणाम मिल रहे हैं.
डेयरी के लिए गाय खरीदते समय केवल मौजूदा दूध उत्पादन देखना पर्याप्त नहीं है.
डेयरी फार्मिंग में जल्दबाजी करने के बजाय धीरे-धीरे आगे बढ़ना जरूरी है. शुरुआती दो साल किसान के लिए सीखने और व्यवस्था मजबूत करने का समय हो सकता है. इस दौरान चारे की व्यवस्था, पशु स्वास्थ्य, दूध की बिक्री, खर्च और आमदनी का हिसाब रखना चाहिए. साहीवाल जैसी नस्लों को भी डेयरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि गीर और दूसरी नस्लों की अपनी अलग विशेषताएं हैं. हालांकि, किसी भी नस्ल को सभी परिस्थितियों में सबसे बेहतर मानना सही नहीं होगा. किसान को अपने क्षेत्र, चारे की उपलब्धता, बाजार और देखभाल की क्षमता के आधार पर पशु का चयन करना चाहिए. सही नस्ल, सीमित संख्या और बेहतर प्रबंधन के साथ डेयरी फार्मिंग को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है.