एग्रीवेट: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले का प्राचीन पशु मेला लंबे समय से देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है. इन दिनों डीडवाना में इन्डोलाव पशु मेला चल रहा है, लेकिन इस बार लंपी डिजीज के चलते मेले की रौनक फीकी पड़ गई है. मेले में पशुओं की संख्या में करीब 60 फीसदी तक कमी आई है. पशु मेला शुरू तो हुआ, लेकिन बीच में ही प्रशासन और पशुपालन विभाग के निर्देशों और सख्ती के चलते पशुओं की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी गई है और इसके पीछे की वजह लंपी बीमारी को बताया गया है. प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मेले में कई राज्यों से हजारों पशुपालक लाखों पशुओं को लेकर पहुंचते हैं. ऐसे में लंपी वायरस के फैलने का खतरा बना हुआ है. मेला परिसर में कई पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं.
राजस्थान पशुपालन विभाग के अनुसार डीडवाना में इन्डोलाव में हर साल पशु मेला लगाया जाता है. यहां की स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों की देखरेख में पशु मेला समिति मेले का आयोजन करती है और इसका आयोजन कई दशक से होता आ रहा है. इस बार भी पशु मेला का आयोजन सितंबर के आखिरी सप्ताह से शुरू किया गया है जो 7 अक्तूबर तक खत्म होना है. लेकिन, लंपी वायरस की वजह से मेले में पशुओं की खरीद-फरोख्त पशुपालन विभाग की ओर से रोक लगा दी गई है.
डीडवाना में इन्डोलाव पशु मेला के प्रभारी खुमाराम सारण ने मीडिया को बताया कि हर साल की तरह इस बार भी पशु मेला का आयोजन किया गया है. इन्डोलाव पशु मेला खास तौर पर नागौरी नस्ल के बैलों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों से पशुपालक और पशु व्यापारी पहुंचते हैं. प्रशासन ने मेला आयोजन से पहले रोक लगाने की बात नहीं कही, इसलिए दूर दराज से पशुपालक और व्यापारी यहां पहुंच हैं. लेकिन अब प्रशासन ने खरीद-फरोख्त रोकने के निर्देश दिए हैं. जिससे पशुपालकों और व्यापारियों में निराशा है.
उन्होंने कहा कि मेले में नागौरी नस्ल के बैलों की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त होती है. नागौरी नस्ल के बैल खेती-बाड़ी में उपयोगी होने के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में नस्ल सुधार के लिए भी मांग में रहते हैं. लंपी डिजीज के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने मेले में गौवंश की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही मेला परिसर में जांच के लिए पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं. ताकि वहां मौजूद पशुओं की जांच की जा सके. जबकि, नए पशुपालकों को मेला में नहीं जाने के लिए कहा जा रहा है.
पशु खरीद फरोख्त पर रोक से किसानों का नुकसान हुआ.
खुमाराम सारण ने बताया कि प्रतिबंध के कारण इस बार मेले में गौवंश की आवक और पशुओं की संख्या में करीब 60 फीसदी तक कमी आई है. दूसरे राज्यों से नागौरी बैल और अन्य गौवंश खरीदने पहुंचे व्यापारी भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं. खरीदारों को उनकी जरूरत के अनुसार पशु नहीं मिल पा रहे हैं. गौवंश की बिक्री पर रोक का सीधा असर पशुपालकों पर भी पड़ा है. मेले में पशु बेचने की उम्मीद लेकर पहुंचे पशुपालकों को बिक्री नहीं होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं, व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है.