एग्रीवेट: Acharya Vidyasagar Yojana for Dairy Farming: मध्य प्रदेश में खेती के साथ डेयरी बिजनेस शुरू करने वाले किसानों और पशुपालकों के लिए सरकारी योजना के जरिए आर्थिक मदद का रास्ता खुलता है. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए बैंक के माध्यम से 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है. योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ना और पशुपालन के जरिए उनकी आय बढ़ाना है. योजना की मदद से 10 मुर्रा भैंसों जैसी दुधारू पशु आधारित डेयरी यूनिट शुरू की जा सकती है. बेहतर प्रबंधन के साथ दूध की बिक्री से रोजाना 2500 से 3000 रुपये तक का कारोबार संभव है.
आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत पात्र किसानों और पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय के लिए बैंक के माध्यम से 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है. इस राशि का इस्तेमाल दुधारू पशुओं की खरीद और डेयरी यूनिट स्थापित करने से जुड़े जरूरी खर्चों में किया जा सकता है. किसान अपनी जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार डेयरी का आकार तय कर सकते हैं. योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देकर परिवारों के लिए स्वरोजगार और नियमित आमदनी का साधन तैयार करना है.
योजना में पात्र हितग्राहियों को सब्सिडी का भी प्रावधान है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सामान्य वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 1.5 लाख रुपये तक और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 2 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. इससे डेयरी शुरू करने में आने वाला शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है. हालांकि, सब्सिडी और ऋण से जुड़े नियमों के लिए आवेदन से पहले संबंधित पशुपालन विभाग से ताजा जानकारी लेना जरूरी है.
डेयरी में मुर्रा भैंसों जैसी अच्छी नस्ल के पशुओं को शामिल करके दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. 10 मुर्रा भैंसों से रोजाना करीब 2500 से 3000 रुपये के दूध की बिक्री का उदाहरण सामने आया है. लेकिन दूध की पूरी बिक्री को मुनाफा नहीं माना जा सकता. चारा, दाना, पानी, पशु स्वास्थ्य और देखभाल पर भी खर्च होता है. इन सभी जरूरी खर्चों को निकालने के बाद करीब 50 हजार रुपये प्रति महीने की बचत संभव होने की बात सामने आई है. किसान डेयरी शुरू करने से पहले स्थानीय दूध बाजार और कुल लागत का हिसाब जरूर लगाएं.
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास कम से कम एक एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी बताया गया है. आवेदन संबंधित पशु चिकित्सा कार्यालय के माध्यम से किया जाता है. इसके लिए आधार कार्ड, समग्र आईडी, भूमि संबंधी दस्तावेज और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेजों की जरूरत होती है. आवेदन के बाद पात्रता की जांच की जाती है और इसके आधार पर ऋण तथा सब्सिडी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है. इच्छुक किसान अपने जिले के पशुपालन विभाग या संबंधित पशु चिकित्सा कार्यालय से योजना की वर्तमान पात्रता, दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेकर डेयरी बिजनेस शुरू कर सकते हैं.