एग्रीवेट: Jute Farming: देश के जूट किसानों और जूट मिलों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. घरेलू जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेश और नेपाल से भारत आने वाले जूट के कुछ उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क बढ़ा दिया गया है. नया शुल्क लागू भी हो चुका है. सरकार का मानना है कि इससे विदेश से आने वाला सस्ता जूट महंगा होगा और भारतीय जूट मिलों को देश के बाजार में मुकाबला करने में मदद मिलेगी. इस फैसले का असर जूट की खेती करने वाले किसान और इस उद्योग से जुड़े मजदूर भी इससे प्रभावित होंगे. सरकार के मुताबिक देश में करीब 40 लाख किसान परिवार कच्चे जूट की खेती से जुड़े हैं, जबकि करीब 4 लाख मजदूर जूट उद्योग में काम करते हैं.
पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश और नेपाल से भारत आने वाले जूट के धागे, बोरे और बोरियों की मात्रा काफी बढ़ी है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) नाम की सरकारी संस्था की समीक्षा के मुताबिक चार साल में इन उत्पादों का आयात करीब 50 फीसदी तक बढ़ गया. इसका मतलब यह हुआ कि भारत में इस्तेमाल होने वाले हर सात टन जूट में करीब एक टन जूट दूसरे देशों से आने लगा था. विदेश से कम कीमत पर माल आने की वजह से भारतीय जूट मिलों के लिए अपने उत्पाद बेचना मुश्किल हो रहा था. सरकार के मुताबिक 2017 में लगाया गया पुराना एंटी-डंपिंग शुल्क अब मौजूदा बाजार की स्थिति के हिसाब से असरदार नहीं रह गया था. इसलिए समीक्षा के बाद विदेशी माल पर नया शुल्क तय किया गया है.
जूट की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल इसकी बिक्री और सही दाम का है. अगर भारतीय जूट मिलों में देश के कच्चे जूट की मांग बढ़ती है, तो किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है. विदेश से आने वाला जूट महंगा होने के बाद भारतीय मिलें घरेलू बाजार से कच्चा माल खरीदने पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं. इससे जूट किसानों की फसल की मांग बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, किसानों को कितना फायदा मिलेगा, यह आगे बाजार में मांग, जूट की कीमत और मिलों की खरीद पर निर्भर करेगा.
सरकारी जांच में यह भी सामने आया कि बांग्लादेश और नेपाल में जूट मिलों को अपने उत्पाद दूसरे देशों में भेजने के लिए कुछ तरह की आर्थिक मदद और टैक्स छूट मिल रही थी. इससे वहां से आने वाला माल कम कीमत पर भारत में बिक पा रहा था. सरकार का कहना है कि इस वजह से भारतीय जूट मिलों पर दबाव बढ़ रहा था और उनके उत्पादन व कमाई पर असर पड़ रहा था. इसी मामले को देखते हुए DGTR ने पहली बार बांग्लादेश और नेपाल से आने वाले जूट उत्पादों पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने की भी सिफारिश की है. हालांकि, इसके लिए वित्त मंत्रालय की अधिसूचना का इंतजार है.
जूट की खेती और इससे जुड़ा उद्योग लाखों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा है. ऐसे में विदेशी सस्ते माल पर शुल्क बढ़ने से घरेलू जूट की मांग बढ़ती है तो इसका फायदा खेत से लेकर मिल तक पहुंच सकता है. सरकार के इस कदम का असली असर आने वाले महीनों में जूट की खरीद, किसानों को मिलने वाले दाम, मिलों के उत्पादन और रोजगार के आंकड़ों से साफ होगा. फिलहाल उम्मीद यही है कि घरेलू जूट उद्योग को बाजार में ज्यादा जगह मिले और किसानों के लिए कच्चे जूट की बिक्री का रास्ता मजबूत हो.