एग्रीवेट: पश्चिम एशिया संकट के बीच खाद की कीमतों में बढ़ोतरी का असर किसानों पर न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी बहुत पहले ही बढ़ा दी. ये जानकारी उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने दी है. उन्होंने कहा कि ईरान- अमेरिका युद्ध से पहले की स्थिति की तुलना में 45 किलो की यूरिया बोरी पर सरकार की सब्सिडी 1,350 रुपये से बढ़कर 2,775 रुपये हो गई है. यानी इसमें 106 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह 50 किलो की DAP बोरी पर सब्सिडी 2,102 रुपये से बढ़कर 3,523 रुपये हो गई है. इसमें करीब 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार के सामने चुनौती यह है कि वैश्विक बाजार में खाद की कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को खाद सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाए.
दरअसल, रबी सम्मेलन के दूसरे दिन कृषि मंत्रियों के सामने प्रस्तुति देते हुए उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने खाद सब्सिडी और उर्वरक उपलब्धा को लेकर यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि दुनिया में खाद की कीमतें बढ़ने से भारत सरकार पर फर्टिलाइजर सब्सिडी का बोझ बढ़ गया है. चालू वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी का खर्च 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. वैश्विक कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो यह आंकड़ा 3 लाख करोड़ रुपये के पार भी जा सकता है. उन्होंने राज्यों से कहा कि खाद और पोषक तत्वों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जाएं. यह सलाह ऐसे समय दी गई है जब 1 अक्टूबर को देश में खाद का शुरुआती स्टॉक तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर था.
उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने कहा कि सरकार ने खरीफ सीजन में खाद की मांग को पूरा किया है और रबी सीजन में भी किसानों की जरूरत पूरी होने की उम्मीद है. 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले रबी सीजन से पहले देश में पर्याप्त खाद का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने बताया कि 27 सितंबर तक यूरिया, DAP, MOP और कॉम्प्लेक्स खाद का कुल स्टॉक 145.46 लाख टन था. इसके अलावा देश में 20.88 लाख टन SSP भी उपलब्ध है. खरीफ सीजन में 32 यूरिया प्लांट ने करीब 149 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया, जिससे खाद की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिली.
उर्वरक सचिव के मुताबिक, रास्ते में और बंदरगाहों पर मौजूद खाद को जोड़ने के बाद इन पांचों तरह की खाद का कुल स्टॉक 206.35 लाख टन तक पहुंच जाएगा. वहीं, रबी सीजन के लिए कुल खाद की मांग 380.96 लाख टन रहने का अनुमान है. इसमें यूरिया 199.27 लाख टन, DAP 55.07 लाख टन, MOP 16.4 लाख टन, कॉम्प्लेक्स खाद 79.12 लाख टन और SSP 31.1 लाख टन की मांग शामिल है.
वैश्विक बाजार में खाद के कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं. इसके साथ ही सल्फर और फॉस्फोरिक एसिड की वैश्विक सप्लाई कम होने से उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है. भारत में DAP और कॉम्प्लेक्स जैसी फॉस्फेटिक खादों के उत्पादन के लिए सल्फर की जरूरत होती है. उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने बताया कि रास्ते में और बंदरगाहों पर मौजूद खाद को जोड़ने के बाद यूरिया, DAP, MOP, कॉम्प्लेक्स और SSP का कुल स्टॉक 206.35 लाख टन तक पहुंच सकता है. वहीं, रबी सीजन के लिए देश में कुल 380.96 लाख टन खाद की मांग रहने का अनुमान है. इसमें यूरिया 199.27 लाख टन, DAP 55.07 लाख टन, MOP 16.4 लाख टन, कॉम्प्लेक्स खाद 79.12 लाख टन और SSP 31.1 लाख टन शामिल है.
सल्फर फॉस्फोरिक एसिड बनाने में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा माल है. इसके बाद इसी फॉस्फोरिक एसिड से DAP और कॉम्प्लेक्स खाद (NPKS) तैयार की जाती है. वैश्विक बाजार में सल्फर की उपलब्धता कम होने से इसकी कीमत तेजी से बढ़ी है. उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा के मुताबिक, फरवरी 2026 में सल्फर की कीमत 532 डॉलर प्रति टन थी, जो बढ़कर 1,050 डॉलर प्रति टन हो गई है. यानी कीमत करीब दोगुनी हो गई है.
ईरान के साथ युद्ध के बाद कतर में उत्पादन प्रभावित होने से सल्फर की उपलब्धता पर असर पड़ा. इसके चलते दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने फॉस्फोरिक एसिड, DAP और NPK खाद का उत्पादन कम कर दिया. इसका असर कीमतों पर भी पड़ा. फॉस्फोरिक एसिड की कीमत 1,290 डॉलर से बढ़कर 1,700 डॉलर प्रति टन हो गई. वहीं, आयातित DAP की कीमत युद्ध से पहले के 681 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 940 डॉलर प्रति टन हो गई.