भर्ती घोटाले में 12 साल बाद बड़ा एक्शन! पूर्व IAS की गिरफ्तारी, अब राज किशोर सिंह पर टिकी नजरें – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में पशुपालन विभाग की भर्ती में कथित घोटाले का मामला करीब 12 साल बाद फिर चर्चा में है. वर्ष 2014 में 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारियों के 1,198 पदों पर हुई भर्ती की जांच के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है. अब तत्कालीन पशुपालन मंत्री राज किशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की लंबित फाइल पर नजरें टिकी हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में नियमों के बदलाव और चयन प्रणाली को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई हैं. हालांकि, मामले में आगे की कार्रवाई शासन से मिलने वाली अनुमति और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014 के दौरान पशुपालन विभाग ने प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारियों के 1,198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी. भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने के बाद इसकी जांच उत्तर प्रदेश आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) को सौंपी गई. उस समय योगेश कुमार पशुपालन विभाग  में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे, जबकि राज किशोर सिंह विभाग के मंत्री थे. जांच एजेंसी भर्ती से जुड़े नियमों, चयन प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करती रही. अब पूर्व IAS अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में है.

जांच में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन मंत्री राज किशोर सिंह और तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार ने भर्ती नियमों में संशोधन किया था. संशोधित व्यवस्था के तहत चयन प्रक्रिया के तरीके में बदलाव हुआ और मंडल स्तर पर चयन के बजाय मुख्यालय में OMR उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आधार पर केंद्रीयकृत मेरिट तैयार की गई. जांच एजेंसी को इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की आशंका हुई. हालांकि, नियमों में बदलाव  और हस्ताक्षर से संबंधित तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा.

EOW की जांच में सामने आया कि लिखित परीक्षा के बाद OMR उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक ही स्थान पर किया गया था. जांचकर्ताओं को इस व्यवस्था में अंकों में कथित हेरफेर की आशंका हुई. इसके अलावा, जिला और मंडल स्तर पर चयन के लिए जिम्मेदार समितियों को भंग किए जाने का मुद्दा भी जांच के दायरे में आया. एजेंसी भर्ती प्रक्रिया में अपनाई गई व्यवस्था और उससे चयन पर पड़े संभावित प्रभाव की पड़ताल कर रही है. इस मामले में भर्ती से जुड़े दस्तावेज, नियमों में संशोधन और चयन प्रक्रिया  की जिम्मेदारी तय करना अहम होगा.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व IAS अधिकारी योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब तत्कालीन मंत्री राज किशोर सिंह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति की फाइल शासन  में लंबित बताई जा रही है. EOW के महानिदेशक जेएन सिंह ने बताया कि योगेश कुमार के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. राज किशोर सिंह को वर्ष 2016 में मंत्री पद से हटा दिया गया था और वह वर्ष 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे. फिलहाल, उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई शासन की अनुमति और जांच की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी. मामले में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; इसका फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा.

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