एग्रीवेट: कर्नाटक में सूखे का असर अब धान और चावल के उत्पादन पर दिखाई देने लगा है. राज्य में इस साल धान की खेती का रकबा काफी घट गया है. इसका असर आने वाले महीनों में चावल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है. पिछले तीन महीनों में चावल की कई किस्मों के खुदरा भाव 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं. कारोबारियों और उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि नवंबर से धान की कटाई शुरू होने वाली है, लेकिन इस साल उत्पादन कम रहने की आशंका है. इससे आने वाले महीनों में चावल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
कर्नाटक देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है. यहां आम तौर पर हर साल करीब 13 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है. लेकिन इस साल सूखे के कारण धान का रकबा चार लाख हेक्टेयर से ज्यादा घट गया है. राज्य में इस साल जून में धान की बुवाई भी कम हुई थी. तुंगभद्रा और कावेरी नदी बेसिन में गंभीर सूखे के कारण किसानों ने धान की खेती का रकबा घटाया है.
कर्नाटक में धान की खेती मुख्य रूप से तुंगभद्रा और कावेरी नदी बेसिन के इलाकों में होती है. इनमें रायचूर, कोप्पल, बल्लारी, विजयनगर, मैसूर, मांड्या और मलनाड के कुछ इलाके प्रमुख हैं. कम बुवाई और सूखे के कारण इस साल धान का उत्पादन घटने की आशंका है. ऐसे में नवंबर से शुरू होने वाली कटाई के बाद बाजार में आवक और सप्लाई की स्थिति पर कारोबारियों की नजर रहेगी. हालांकि, कर्नाटक में सूखे और धान की कम बुवाई का असर अब चावल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है. थोक बाजार में सोना मसूरी चावल की कीमत 50 रुपये से बढ़कर 75 से 80 रुपये प्रति किलो हो गई है. वहीं, कोलम चावल का भाव करीब 75 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.
इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजिस्ट्स के अध्यक्ष और राज्य सरकार के पूर्व कृषि सलाहकार एबी पाटिल ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि धान उन फसलों में शामिल है, जिनमें पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि एक किलो धान पैदा करने में करीब 3,500 से 4,000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में कर्नाटक में बांधों का जलस्तर कम होना चिंता की बात है. कृषि मौसम विशेषज्ञ और यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के पूर्व रजिस्ट्रार प्रोफेसर एमबी राजेगौड़ा ने कहा कि कर्नाटक में धान की बुवाई आमतौर पर जून-जुलाई में होती है. इसकी कटाई अक्टूबर से नवंबर तक चलती है और कुछ इलाकों में दिसंबर तक भी जारी रहती है.
कर्नाटक में धान और चावल की कीमतों में तेजी का असर अब मिलर्स पर भी दिखाई दे रहा है. मिलर्स के मुताबिक, वे इस समय किसानों से धान करीब 4,400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद रहे हैं. कुछ महीने पहले यही धान करीब 3,000 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा था. एक मिल मालिक ने कहा कि अब धान खरीदने की कीमत लगभग उतनी हो गई है, जितने भाव पर पहले मिल से चावल बेचा जाता था. पहले वह चावल डीलरों को 4,600 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल में बेचते थे. अब यही चावल करीब 7,500 रुपये प्रति क्विंटल में बेचा जा रहा है. वहीं, कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के सलाहकार रमेश चंद्र लाहोटी ने बताया कि चावल की औसत कीमत में पिछले कुछ समय में 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी हुई है.