एग्रीवेट: किसानों को नकली बीज, मिलावटी खाद और घटिया कीटनाशकों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता और वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित प्री-रबी किसान गोष्ठी में कहा कि किसानों तक कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों का लाभ पहुंचना चाहिए. उन्होंने प्राकृतिक खेती, मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल को खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने का अहम तरीका बताया. कार्यक्रम में पूर्वी भारत में कृषि की संभावनाओं, रबी फसलों के विस्तार और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.
रांची के गढ़खटंगा स्थित भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-आईआईएबी) में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि किसानों को नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों से बचाना जरूरी है. खेती में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता सीधे फसल की पैदावार और किसानों की लागत को प्रभावित करती है. ऐसे में किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीक, मूल्य संवर्धन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा. कृषि अनुसंधान संस्थानों में तैयार तकनीकों का लाभ देश के हर किसान तक पहुंचना चाहिए, ताकि किसान बेहतर तरीके अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकें.
भागीरथ चौधरी ने किसानों से अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच कराने और जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करने से खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है. इससे मिट्टी की सेहत बनाए रखने और फसल की उत्पादकता बढ़ाने के अवसर भी मिलते हैं. किसानों के लिए जरूरी है कि वे बिना जरूरत खाद का इस्तेमाल करने के बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों का चुनाव करें. वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती में संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा कि पूर्वी भारत में कृषि विकास की व्यापक संभावनाएं हैं. उन्होंने झारखंड में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में रबी फसलों की खेती बढ़ाने पर जोर दिया. इससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और किसानों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिल सकते हैं. कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया.
इस प्री-रबी किसान गोष्ठी में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ के करीब 1,500 किसानों ने हिस्सा लिया. किसानों के बीच गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के उन्नत बीजों के साथ नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और मिनरल मिक्सचर सहित विभिन्न कृषि सामग्री वितरित की गई. शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय जलवायु और संसाधनों के अनुरूप फसलों तथा उन्नत बीजों का चयन करने की सलाह दी. उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया. कार्यक्रम के दौरान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी खेत बचाओ अभियान शुरू करने का आह्वान किया गया. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और खेती को अधिक टिकाऊ व लाभकारी बनाने के उपायों को बढ़ावा देना रहा.