गेहूं के साथ करें सरसों-मटर की सहफसली खेती.. लागत घटेगी और बढ़ेगी कमाई, कृषि विशेषज्ञ ने बताया फॉर्मूला – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Wheat cultivation: रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे में किसान अगर गेहूं के साथ दलहन और तिलहन फसलों की सहफसली खेती करें, तो एक ही खेत से अतिरिक्त आमदनी हासिल की जा सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही फसल संयोजन और वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने पर खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ मौसम से होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम किया जा सकता है. गेहूं के साथ सरसों, मटर, चना और मसूर जैसी फसलों को सहफसल के रूप में लगाया जा सकता है.

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, गेहूं के साथ सरसों  की सहफसली खेती करने वाले किसान 9:1 के अनुपात को अपना सकते हैं. यानी खेत में गेहूं की 9 कतारों के बाद सरसों की एक कतार रखी जा सकती है. इस तरीके से मुख्य फसल गेहूं के साथ किसान को सरसों से भी अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त हो सकता है. सहफसली खेती में फसलों की कतार और दूरी का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है. इससे दोनों फसलों को पर्याप्त जगह, धूप और पोषक तत्व मिलते हैं और किसान एक ही खेत का बेहतर इस्तेमाल कर पाते हैं.

गेहूं के साथ दलहन फसलों की खेती  करने वाले किसान मटर या मसूर को भी सहफसल के तौर पर लगा सकते हैं. इसके लिए 2:2 या 2:3 अनुपात अपनाया जा सकता है. यानी दो कतार गेहूं के साथ दो या तीन कतार दलहन फसल की रखी जा सकती हैं. दलहन फसलों को गेहूं के साथ शामिल करने से किसान को एक ही सीजन में दो तरह की फसल से उत्पादन और आमदनी का अवसर मिलता है. इससे किसी एक फसल पर पूरी निर्भरता भी कम होती है.

सहफसली खेती का एक फायदा मिट्टी की उर्वरता  से भी जुड़ा है. दलहन फसलें वातावरण से नाइट्रोजन प्राप्त करने में मदद करती हैं, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बेहतर हो सकती है. इससे किसान को नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता. हालांकि, उर्वरक की मात्रा मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत के अनुसार तय करनी चाहिए. मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करना खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है.

दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा  देने के लिए किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत बीज और कृषि सामग्री पर सहायता भी मिल सकती है. कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, कई जगह किसानों को किट उपलब्ध कराने के साथ बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ दिया जाता है. किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या ब्लॉक स्तर के कार्यालय से उपलब्ध योजना, पात्रता और अनुदान की जानकारी लेकर इसका लाभ उठा सकते हैं. गेहूं के साथ सहफसल अपनाने से किसान को अतिरिक्त उत्पादन का विकल्प मिलता है और मौसम की वजह से किसी एक फसल को नुकसान होने पर दूसरी फसल से कुछ आय बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

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