एग्रीवेट: देश में प्याज की उपलब्धता बेहतर होने लगी है. मंडियों में आवक बढ़ने और नई खरीफ प्याज की आवक शुरू होने से कीमतों में भी गिरावट आई है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, देश के कई मंडियों और प्रमुख बाजारों में प्याज के भाव नरम हुए हैं. मंत्रालय के अनुसार, महाराष्ट्र में प्याज का औसत मंडी भाव करीब 13 फीसदी घटा है. 16 सितंबर को यह करीब 4,030 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 3 अक्टूबर को घटकर लगभग 3,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गया. मंत्रालय ने कहा कि मंडियों में लगातार बढ़ रही आवक का असर अब कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है. ज्यादा आवक से प्याज की उपलब्धता बेहतर हुई है, जिससे मंडी और उपभोक्ता बाजारों में भाव नरम पड़े हैं. नई खरीफ प्याज की आवक बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में भी बाजार में आपूर्ति की स्थिति मजबूत रहने की उम्मीद है.
मंडियों के साथ अब खुदरा बाजार में भी प्याज की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में देश के 126 शहरों में प्याज के खुदरा भाव 1 से 21 रुपये प्रति किलो तक घटे हैं. प्रमुख प्याज खपत वाले राज्यों में भी कीमतों में नरमी आई है. मंत्रालय के अनुसार, प्रमुख उत्पादक राज्यों से नई खरीफ प्याज की आवक शुरू हो गई है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से प्याज की नई फसल मंडियों में पहुंच रही है. इसके अलावा, पुराने स्टॉक से भी बाजार की जरूरत पूरी की जा रही है. आने वाले हफ्तों में इन राज्यों से प्याज की आवक और बढ़ने की उम्मीद है. इससे प्रमुख खपत वाले बाजारों में प्याज की उपलब्धता बेहतर होगी. बात अगर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की करें तो यहां पर खुदरा मार्केट में प्याज 10 रुपये किलो सस्ता हो गया है. 70 रुपये किलो वाला प्याज अब 60 रुपये में बिक रहा है. इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी प्याज का रेट 60 रुपये किलो हो गया है. इससे आम जनता को कुछ हद तक राहत मिली है.
सरकार के मुताबिक, नई फसल की बढ़ती आवक और मौजूदा स्टॉक से आने वाले त्योहारी सीजन में प्याज की उपलब्धता मजबूत रहने की उम्मीद है. इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. देश में खरीफ प्याज की फसल को लेकर अच्छी खबर है. इस साल खरीफ प्याज का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 5 फीसदी बढ़ा है. प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति भी अच्छी बताई जा रही है. इससे आने वाले समय में प्याज की उपलब्धता बेहतर रहने की उम्मीद है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में प्रमुख खरीफ प्याज उत्पादक क्षेत्रों में बहुत ज्यादा बारिश का अनुमान नहीं है. इससे किसानों को प्याज की खुदाई, सुखाने और मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी. कम बारिश से खेतों में ज्यादा नमी के कारण फसल खराब होने का खतरा भी कम रहेगा. इससे बाजार में प्याज की आवक बढ़ने की उम्मीद है.
सरकार बफर स्टॉक से प्याज निकालकर खपत वाले शहरों में इसकी आपूर्ति बढ़ा रही है. सरकार के मुताबिक, अब तक 2 लाख क्विंटल से ज्यादा प्याज बफर स्टॉक से बाजार में भेजा जा चुका है. इसके लिए 8 कांदा एक्सप्रेस और 467 ट्रकों का इस्तेमाल किया गया है. इनके जरिए देश के 123 शहरों तक प्याज पहुंचाया गया है. वहीं, सरकार अब प्याज की सप्लाई बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रेल रैक चलाने की भी योजना बना रही है. इससे ज्यादा मात्रा में प्याज कम समय में उन बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा, जहां इसकी खपत ज्यादा है. त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार अतिरिक्त रेल परिवहन की तैयारी कर रही है. इसका मकसद प्याज की सप्लाई को तेज और बेहतर बनाना है, ताकि बाजार में इसकी उपलब्धता बनी रहे.
सरकार के मुताबिक, बाजार में प्याज की सप्लाई के लिए कई स्रोत उपलब्ध हैं. नई खरीफ फसल की आवक शुरू हो गई है. इसके अलावा पुराने स्टॉक से भी प्याज की जरूरत पूरी की जा रही है. वहीं, बफर स्टॉक का प्याज भी लगातार खपत वाले शहरों तक पहुंचाया जा रहा है. सरकार मंडियों में प्याज की आवक, उपलब्ध स्टॉक और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है. जहां भी जरूरत होगी, वहां प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और इसकी सप्लाई को बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.