एग्रीवेट: महाराष्ट्र भयंकर सूखा संकट झेल रहा है और इससे किसानों पर आर्थिक तंगी बढ़ गई है. साहूकारों और बैंकों के कर्ज ने किसानों को आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर कर दिया है. हालांकि, राज्य सरकार ने लोन की रिकवरी या किस्तों की वसूली से फिलहाल रोक लगा रखी है. कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले दोनों किसान लातूर जिले के रहने वाले थे और दोनों ही फसल खराब होने के चलते कर्ज चुकाने की चिंताओं में डूबे थे. इन घटनाओं पर राजस्व विभाग की टीम को जांच और राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.
महाराष्ट्र के लातूर जिले के पालशी गांव में 60 वर्षीय किसान जीवन गव्हाणे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. पुलिस के हवाले से पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि किसान पर करीब 1.90 लाख रुपये का कर्ज हो गया था और उनकी फसल खराब होने से वह कर्ज चुकाने को लेकर परेशान थे. अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि यह घटना ऐसे समय हुई है जब इस पश्चिमी राज्य के करीब 80 फीसदी तहसीलों में भीषण सूखे की स्थिति बनी हुई है.
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह घटना 7 अक्टूबर की है. मृतक किसान के परिवार के लोगों का दावा है कि फसल खराब होने के कारण उन पर करीब 1.90 लाख रुपये का कर्ज हो गया था. इसमें करीब 90 हजार रुपये एक निजी बैंक का कर्ज और लगभग एक लाख रुपये साहूकार का कर्ज था. परिजनों के अनुसार इसी कर्ज के बोझ के चलते उन्होंने मंगलवार रात यह कठोर कदम उठाया.
किसान जीवन गव्हाणे ने रेणापुर तहसील के पालशी गांव स्थित अपने खेत में एक पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. रेणापुर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने मीडिया से कहा कि हमें सूचना मिली है कि किसान ने आत्महत्या की है, लेकिन इसकी सटीक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है. मामले की जांच शुरू की गई है. वहीं, राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भी जांच शुरू की है.
दूसरी घटना में 2 अक्टूबर को लातूर के अहमदपुर तहसील में 60 वर्षीय किसान तुकाराम निवृत्ति गुट्टे ने अपने खेत में पेड़ से फांसी लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. परिवार का आरोप है कि सूखे के कारण डेढ़ एकड़ में लगी सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई थी. बैंक कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने की चिंता से वह परेशान थे. मृतक किसान घरवाले से कहता था कि फसल बर्बाद हो गई है और अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाऊंगा.
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं का यह कोई पहला या दूसरा मामला नहीं है. बीते अगस्त में भी लातूर जिले की उदगीर तहसील के हंदर्गुली गांव निवासी रामदास शिवाजी बोलेगावे ने तीन साहूकारों के उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी और उनका शव आम के पेड़ पर लटका पाया गया था. पीटीआई के अनुसार सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी से जून तक 6 महीने के दौरान मराठवाड़ा और अमरावती में 880 किसानों ने अपना जीवन खत्म कर लिया. जून महीने 82 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान दी, जो हर दिन दो मौतों की संख्या से भी ज्यादा है.