एग्रीवेट: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है. पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को गिरफ्तार किया है. इससे पहले पुलिस ने बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल होने के आरोप में उनके और संगठन के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी.
कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एक घंटे के अंदर मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में SEM के सामने पेश किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि 24 घंटे की समय-सीमा जल्द ही खत्म होने वाली है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में शांति बनाए रखने के लिए पहले दिए गए पीस बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने से जुड़ी धाराएं भी शामिल हैं.
यह कार्रवाई उस समय हुई, जब CJP के कार्यकर्ता कड़ी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर में दाखिल हो गए. वहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए. हाल ही में जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया गया है. मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और CJP के कुछ अन्य सदस्यों को कथित तौर पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. हालांकि, CJP का दावा है कि पुलिस ने उसके करीब 11 सदस्यों को हिरासत में लिया है.
पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को द्वारका जिले के जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया. कुछ CJP कार्यकर्ताओं के थाने के बाहर जुटने के बाद पुलिस ने वहां और आसपास सुरक्षा बढ़ा दी. CJP के संस्थापक दीपके ने कहा कि संगठन की यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर दोबारा अपना अधिकार जताने की कोशिश है. उन्होंने साफ किया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा.
इससे पहले शनिवार को भी दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था. उस दिन सुरक्षा कड़ी होने के कारण CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. तीनों को एक दिन बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे अगले एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे. CJP के मुताबिक, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की घोषणा 12 अक्टूबर को की गई थी. संगठन ने बताया कि उसी दिन उसके प्रतिनिधि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय कराने के उद्देश्य से संसद मार्ग थाने पहुंचे थे.