एग्रीवेट: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और केंद्र सरकार से तत्काल मदद की मांग की. फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के 358 में से करीब 80 फीसदी तालुकों में पीने के पानी और चारे की कमी है. उन्होंने फसल नुकसान के मुआवजे और चारे की व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत केंद्र से 17,500 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की है.
सीएम फडणवीस ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने केंद्र की ओर से हर संभव अधिकतम मदद का भरोसा दिया है. महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया था. इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत के उपाय शुरू किए गए थे. फडणवीस ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि केंद्र उन तालुकों में भी सूखा राहत देने पर विचार करने के लिए तैयार है, जहां कुछ तकनीकी मानदंड पूरे नहीं हो रहे हैं.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के करीब 20 और तालुकों को भी सूखा राहत के दायरे में शामिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सैटेलाइट से जुड़े कुछ मानदंड पूरे नहीं होने के बावजूद बारिश, भूजल स्तर और जमीनी जांच के आधार पर राहत देने पर विचार किया जाएगा. फडणवीस ने कहा कि बारिश की असमानता से हुए फसल नुकसान को भी राहत तय करते समय ध्यान में रखा जाएगा. फडणवीस ने कहा कि किसानों की मदद के लिए राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाली राशि का इंतजार नहीं करेगी. सरकार अपने संसाधनों से किसानों को राहत देने की तैयारी कर रही है. कुछ इलाकों में फसलों का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सर्वे जारी है.
फडणवीस ने कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत से रिकॉर्ड देखें तो महाराष्ट्र में आमतौर पर नवंबर के आखिर या दिसंबर में सूखा घोषित किया जाता रहा है. लेकिन इस बार सरकार ने सितंबर में ही सूखा घोषित कर दिया, ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत राहत मिल सके. उन्होंने कहा कि किसानों को जल्द मदद पहुंचाने के लिए सरकार कुछ प्रक्रियात्मक नियमों में ढील देने के लिए भी तैयार है.
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र का लातूर जिला सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है. जिले के सभी 10 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है. मॉनसून के दौरान कम बारिश और लंबे समय तक बारिश नहीं होने से यहां हालात बिगड़े हैं. सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने महाराष्ट्र का पहला समर्पित सूखा राहत वॉर रूम बनाया है. जिला कलेक्टर भारत बस्तेवाड़ ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 के तहत 30 सितंबर को इसका आदेश जारी किया था.
कलेक्टर भारत बस्तेवाड़ ने कहा कि सूखे की स्थिति में लगातार निगरानी और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल जरूरी है. इसलिए जिला स्तर पर यह वॉर रूम बनाया गया है. वॉर रूम की प्रमुख जिम्मेदारी गांवों से रोजाना पानी की स्थिति की रिपोर्ट लेना होगी. इसमें पीने के पानी के स्रोत, उपलब्ध पानी, टैंकर की जरूरत और टैंकर भरने की जगहों की जानकारी शामिल होगी. साथ ही वॉर रूम के जरिए सार्वजनिक जल स्रोतों से अवैध रूप से पानी निकालने पर कार्रवाई की निगरानी भी की जाएगी. अवैध रूप से पानी खींचने वाले पंप जब्त करने, अनधिकृत पानी के कनेक्शन हटाने और पानी की बर्बादी रोकने के उपायों पर भी नजर रखी जाएगी.