आलू किसानों को राहत! कोल्ड स्टोरेज में भंडारण पर मिलेगा 100 रुपये क्विंटल अनुदान, 20 हजार तक फायदा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश के आलू किसानों के लिए राहत की खबर है. अब उन्हें आलू की खुदाई के बाद उपज को स्टोर करने के लिए मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा. क्योंकि राज्य सरकार ने निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने पर अनुदान देने की योजना का दायरा बढ़ा दिया है. अब पात्र किसानों को निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारण के लिए प्रति क्विंटल 100 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से किसानों को फायदा होगा. वे अपनी उपज को लंबे समय तक कोल्ड स्टोरेज में भंंडारित कर पाएंगे और मार्केट रेट मिलने पर बेच सकेंगे. इससे किसानों की पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफा होगा.

सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य किसानों पर कोल्ड स्टोरेज के बढ़ते खर्च  का बोझ कम करना है. सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता सीधे भंडारण लागत को कम करने में मदद करेगी. योजना के तहत पात्र किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि पर पैदा किए गए आलू के भंडारण के लिए अनुदान का लाभ उठा सकते हैं. इससे किसानों को फसल को सुरक्षित रखने और बाजार में बेहतर भाव मिलने तक उसे स्टोर करने में मदद मिल सकती है.

योजना के तहत एक किसान को अधिकतम 20,000 रुपये तक का सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है. इससे किसानों को आलू के भंडारण पर आने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी. वहीं, बसती के जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी का कहना है किसानों को सिर्फ भंडारण पर ही राहत नहीं दी जा रही है. बाजार में आलू के दाम अचानक गिरने की स्थिति में किसानों को नुकसान से बचाने के लिए भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना भी जिले में लागू कर दी गई है.

इस योजना का उद्देश्य आलू के भाव में अचानक गिरावट आने पर किसानों को आर्थिक नुकसान  से बचाना है. इससे किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचने की मजबूरी से राहत मिल सकती है. इस योजना के तहत अगर बाजार में आलू का भाव उसकी लागत से काफी नीचे चला जाता है, तो तय नियमों के अनुसार किसानों को सरकार की ओर से अनुदान दिया जाएगा. यह सहायता राशि सीधे DBT के जरिए किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाएगी.

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को आवेदन के समय कुछ जरूरी दस्तावेज  ऑनलाइन अपलोड करने होंगे. इनमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खसरा-खतौनी यानी जमीन का विवरण, कोल्ड स्टोरेज की ओर से जारी भंडारण रसीद (तकपट्टी) और गेटपास शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि किसानों को बिचौलियों से बचाने और योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है. इस योजना का उद्देश्य किसानों को आलू के सुरक्षित भंडारण की सुविधा देना और भंडारण का खर्च कम करना है. इससे किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बाजार में बेहतर भाव मिलने पर बेच सकेंगे.

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