धान बुवाई में 15.56 लाख हेक्टेयर की गिरावट, तेलंगाना-कर्नाटक सर्वाधिक प्रभावित.. जानें यूपी का हाल – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: इस खरीफ सीजन में धान की खेती को बड़ा झटका लगा है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार धान की बुवाई का रकबा 15.56 लाख हेक्टेयर यानी 3.5 फीसदी घट गया है. प्रमुख खरीफ फसलों में धान के रकबे में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. कृषि मंत्रालय के 2 अक्टूबर तक के अंतिम फसलवार बुवाई आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सीजन में देशभर में 433.62 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है. पिछले साल इसी अवधि में धान का रकबा 449.18 लाख हेक्टेयर था.

धान के रकबे में यह गिरावट अन्य प्रमुख खरीफ फसलों के मुकाबले काफी ज्यादा है. मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश का असर धान की खेती पर पड़ा है. राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में धान के रकबे में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यहां पिछले साल के 27.25 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 22.99 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई, यानी 4.26 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. इसके बाद कर्नाटक का नंबर है. राज्य में धान का रकबा पिछले साल के 10.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.20 लाख हेक्टेयर रह गया है. यानी यहां भी 4.23 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है.

देश में सबसे ज्यादा धान पैदा करने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भी इस साल धान की बुवाई का रकबा घटा है. यहां पिछले साल के मुकाबले 1.84 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. इस खरीफ सीजन में यूपी में 69.21 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई है. मध्य प्रदेश में धान का रकबा 1.75 लाख हेक्टेयर घटा है. वहीं, आंध्र प्रदेश में 1.70 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 1.41 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा महाराष्ट्र में 1.15 लाख हेक्टेयर और झारखंड में 1 लाख हेक्टेयर धान का रकबा कम हुआ है.

हालांकि, कुछ राज्यों में धान की खेती का रकबा बढ़ा है. ओडिशा में सबसे ज्यादा 0.66 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद असम में 0.59 लाख हेक्टेयर और बिहार में 0.26 लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ा है. गुजरात, हरियाणा और पंजाब में भी धान की खेती के रकबे में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आंकड़ों से साफ है कि खरीफ फसलों के रकबे में गिरावट सभी फसलों और राज्यों में एक जैसी नहीं रही. कुछ राज्यों में धान की खेती घटी है, जबकि कई राज्यों में इसके रकबे में बढ़ोतरी भी हुई है.

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में दलहन की खेती का रकबा 2.57 लाख हेक्टेयर बढ़कर 122.39 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसमें उड़द की बुवाई 2.96 लाख हेक्टेयर और अरहर का रकबा 1.49 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. हालांकि, मूंग की खेती का रकबा 1.17 लाख हेक्टेयर घटा है. मोटे अनाज की बात करें तो ज्वार का रकबा 1.30 लाख हेक्टेयर और बाजरा का रकबा 2.09 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. वहीं, मक्के की खेती में 2.80 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है.

इस खरीफ सीजन में तिलहन का कुल रकबा 1.11 लाख हेक्टेयर बढ़कर 196.66 लाख हेक्टेयर हो गया है. तिल की खेती 1.37 लाख हेक्टेयर और सूरजमुखी का रकबा 0.59 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. वहीं, अरंडी की खेती 0.80 लाख हेक्टेयर घट गई है. कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस साल कपास की खेती 110.53 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल यह रकबा 111.08 लाख हेक्टेयर था. यानी कपास का रकबा 0.55 लाख हेक्टेयर घटा है. वहीं, गन्ने की खेती में भी मामूली गिरावट आई है. इस साल गन्ने का रकबा 0.26 लाख हेक्टेयर घटा है.

कृषि मंत्रालय के ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश असमान रही. कई क्षेत्रों में बारिश की कमी का असर फसलों की बुवाई पर पड़ा है. धान के रकबे में आई बड़ी गिरावट खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि चावल देश की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है और इसका सीधा संबंध खाद्यान्न की उपलब्धता से है.

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