रबी की बुआई से पहले कर लें ये 6 काम, वरना फसल की पैदावार पर पड़ सकता है असर – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Rabi Crop Farming: खरीफ की फसलों की कटाई शुरू होते ही किसानों के सामने रबी सीजन की तैयारी की चुनौती खड़ी हो जाती है. गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर और जौ जैसी फसलों से बेहतर उत्पादन लेने के लिए सिर्फ समय पर बुआई करना ही काफी नहीं है. इसके लिए खेत की मिट्टी, नमी, खाद, बीज और सिंचाई की तैयारी पहले से करना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बुआई से पहले की गई सही तैयारी फसल के अच्छे अंकुरण, मजबूत जड़ों और बेहतर उत्पादन की नींव तैयार करती है. इसलिए किसान खरीफ की कटाई के साथ ही रबी फसल की तैयारी शुरू कर दें.

खरीफ की फसल  कटने के बाद खेत में अक्सर फसल अवशेष, ठूंठ और खरपतवार रह जाते हैं. इन्हें जलाने के बजाय किसान मल्चिंग या खाद बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बाद मिट्टी की नमी और स्थिति को देखते हुए खेत की जुताई करनी चाहिए. सामान्य तौर पर पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और इसके बाद जरूरत के अनुसार हैरो या कल्टीवेटर चलाया जा सकता है. इससे मिट्टी भुरभुरी होती है और जड़ों के विकास के लिए बेहतर वातावरण बनता है. जुताई के बाद खेत को समतल करना भी जरूरी है, ताकि सिंचाई का पानी समान रूप से पहुंच सके. धान की कटाई के बाद गेहूं की बुआई में कम जुताई या शून्य जुताई तकनीक भी अपनाई जा सकती है.

रबी फसलों की तैयारी  में मिट्टी की जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. मृदा परीक्षण से खेत में मौजूद पोषक तत्वों, पीएच और जैविक पदार्थ की स्थिति का पता चलता है. इसके आधार पर किसान फसल की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरक की मात्रा तय कर सकते हैं. मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे मिट्टी की संरचना और पानी रोकने की क्षमता बेहतर होती है. विशेषज्ञ के अनुसार, बिना जांच के जरूरत से ज्यादा खाद डालने से लागत बढ़ सकती है और मिट्टी पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

रबी मौसम में बारिश कम होने के कारण सिंचाई की व्यवस्था  पहले से करना जरूरी है. गेहूं में पहली सिंचाई बुआई के करीब 21 दिन बाद उपयोगी मानी जाती है, जबकि आगे की सिंचाई मिट्टी की नमी और फसल की अवस्था के अनुसार करनी चाहिए. सरसों में फूल आने के समय पर्याप्त नमी महत्वपूर्ण होती है. खाद एवं उर्वरक का इस्तेमाल भी मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर करना चाहिए. नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग जरूरी है. अधिक उर्वरक डालना अधिक उत्पादन की गारंटी नहीं है.

किसानों को रबी फसलों के लिए प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज  की व्यवस्था बुआई से पहले कर लेनी चाहिए. अलग-अलग फसलों की बुआई का समय अलग होता है, इसलिए कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार समय तय करना बेहतर रहेगा. किसान जरूरत के अनुसार शून्य जुताई, न्यूनतम जुताई, लेजर लैंड लेवलिंग और मशीन से सीधी बुआई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं. बुआई से पहले खेत में पर्याप्त नमी, समतल जमीन, खरपतवार नियंत्रण, जल निकासी और खाद की उपलब्धता जरूर जांच लें. समय पर की गई ये छोटी तैयारियां बुआई की जल्दबाजी और अतिरिक्त खर्च को कम करने के साथ फसल की बेहतर शुरुआत में मदद कर सकती हैं.

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