सोयाबीन बीज के खराब अंकुरण पर घिरी कंपनियां.. 22 हजार शिकायतों के बाद पंचनामों पर उठे सवाल – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: महाराष्ट्र में सोयाबीन के बीजों का अंकुरण सही तरह से नहीं पाया है. ऐसे में बीज कंपनियों और कृषि विभाग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. कई बीज कंपनियों ने कृषि अधिकारियों की ओर से तैयार किए गए पंचनामों पर सवाल उठाए हैं. कंपनियों का कहना है कि इन रिपोर्टों में यह साबित करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है कि फसल खराब होने की वजह बीज ही थे. हालांकि, कृषि विभाग ने बीज कंपनियों के खिलाफ 85 एफआईआर दर्ज की हैं.

दरअसल, महाराष्ट्र कृषि विभाग के बीज एवं इनपुट गुणवत्ता आश्वासन निदेशालय की ओर से पिछले कुछ हफ्तों में इस मामले को लेकर सुनवाई की गई. ये सुनवाई राज्य में जुलाई के दौरान मिली सोयाबीन बीज के खराब अंकुरण की 22 हजार से ज्यादा शिकायतों की जांच के तहत हो रही है. शिकायतों के बाद मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में बीज कंपनियों के खिलाफ 85 एफआईआर दर्ज की गई थीं. अब सुनवाई के दौरान कंपनियां पंचनामा रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों और जांच के तरीके पर सवाल उठा रही हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी कार्रवाई से पहले किसानों की शिकायतों, खेतों में हुई जांच और बीज कंपनियों के पक्ष को समझना जरूरी है. इसी वजह से शिकायतों पर सुनवाई की जा रही है. कुछ बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कृषि अधिकारियों की ओर से तैयार किए गए पंचनामों के तरीके पर सवाल उठाए हैं. कंपनियों की एक प्रमुख आपत्ति यह है कि कुछ पंचनामों में बुवाई की सही तारीख दर्ज नहीं की गई है. कंपनियों का यह भी कहना है कि कुछ मामलों में एक ही बीज लॉट से बीज खरीदने वाले सिर्फ दो या तीन किसानों ने खराब अंकुरण की शिकायत की. वहीं, उसी लॉट के बीज खरीदने वाले दूसरे किसानों ने सामान्य अंकुरण होने की जानकारी दी है. कंपनियों का तर्क है कि इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही यह तय किया जाना चाहिए कि खराब अंकुरण के लिए बीज जिम्मेदार हैं या नहीं.

बीज कंपनियों ने सोयाबीन के खराब अंकुरण की शिकायतों पर अपनी सफाई में कहा है कि एक बीज लॉट करीब 200 क्विंटल का हो सकता है. अगर उसी लॉट के बीज से दूसरे खेतों में फसल का अंकुरण सामान्य रहा है, तो कुछ मामलों में खराब अंकुरण की वजह खेत से जुड़े कारण भी हो सकते हैं. इनमें बीज को सही तरीके से न रखना, ज्यादा गहराई में बुवाई करना और खेती के दूसरे तरीकों में गलती शामिल है. महाराष्ट्र कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रण एवं इनपुट निदेशक सुनील बोरकर ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को कहा कि 7 बीज कंपनियों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिनके खिलाफ किसानों की सबसे ज्यादा शिकायतें मिली थीं. इन कंपनियों ने संबंधित इलाकों में कृषि अधिकारियों की ओर से तैयार किए गए पंचनामों पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि विभाग इन पंचनामों की जांच और समीक्षा कर रहा है. अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

अधिकारियों के मुताबिक, कुछ बीज कंपनियों ने प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की इच्छा भी जताई है. विभाग पुराने मामलों और अदालत के फैसलों का अध्ययन कर रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि किसानों को किस तरह और कितनी राशि का मुआवजा दिया जा सकता है. सुनील बोरकर ने कहा कि पुराने मामलों में कंपनियों की ओर से किसानों को दिए गए मुआवजे और अदालत के फैसलों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा. फिलहाल इस बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की जा सकती.

महाराष्ट्र के सोयाबीन किसानों के लिए इस साल मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. मॉनसून देर से आने के कारण किसानों को पहले बुवाई में देरी करनी पड़ी. इसके बाद कई इलाकों में बीज के खराब अंकुरण की वजह से दोबारा बुवाई करनी पड़ी. इससे किसानों की खेती की लागत करीब 30 फीसदी तक बढ़ गई. अब मराठवाड़ा और विदर्भ के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक जिलों में लंबे समय तक बारिश का अंतर रहने से फसल को एक और झटका लगा है. कई इलाकों के किसानों को डर है कि इस बार सोयाबीन की पैदावार एक क्विंटल प्रति एकड़ से भी कम रह सकती है.

हालांकि, किसान संगठनों से जुड़े लोगों ने खराब अंकुरण के लिए किसानों की खेती से जुड़ी गलतियों को जिम्मेदार ठहराने के तर्क पर सवाल उठाए हैं. अकोला के किसान कार्यकर्ता विलास ताथोड़ ने कहा कि किसान शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मुआवजा मिलने की संभावना कम होने के बावजूद अपनी समस्या क्यों बताएंगे. उन्होंने कहा कि समय की कमी के कारण हजारों किसानों ने शिकायत तक दर्ज नहीं कराई.

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