एग्रीवेट: नई रबी फसल की बुवाई से पहले सरसों और चने के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर चल रहे हैं. इससे खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है. कारोबारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल और दालों के दाम बढ़ने का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है. इसके चलते सरसों और चने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. फिलहाल राजस्थान की भरतपुर मंडी में किसान पिछले सीजन की सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा के भाव पर बेच रहे हैं. यह अगले मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए तय 6,613 रुपये प्रति क्विंटल के MSP से करीब 21 फीसदी ज्यादा है.
सरकार ने 2027-28 मार्केटिंग सीजन के लिए सरसों और चने का MSP तय किया है. लेकिन मौजूदा बाजार भाव MSP से ऊपर रहने से किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं, वहीं उपभोक्ताओं के लिए खाद्य तेल और दालों की कीमतों का दबाव चिंता बढ़ा सकता है. भरतपुर स्थित किसान संगठन उत्तान मस्टर्ड प्रोड्यूसर कंपनी के CEO रूप सिंह ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को कहा कि सरसों की बुवाई जल्द शुरू होने वाली है. किसानों को अभी सरसों के अच्छे भाव मिल रहे हैं, जो सरकार की ओर से तय MSP से काफी ज्यादा हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में भी बाजार भाव MSP से काफी ऊपर रहने के कारण सरकारी एजेंसियां मूल्य समर्थन योजना के तहत तिलहन की खरीद नहीं कर सकीं. किसानों को अपनी सरसों खुले बाजार में ही MSP से ज्यादा कीमत पर बेचनी पड़ी. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है. भारत अपनी सालाना खाद्य तेल जरूरत का करीब 58 फीसदी हिस्सा आयात करता है. ऐसे में विदेशी तेल महंगा होने से घरेलू तिलहन की मांग बढ़ी है.
वहीं, चने के भाव भी MSP से ऊपर चल रहे हैं. देश में कुल दाल उत्पादन में चने की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है. मंडियों में चना 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है. जबकि अगले मार्केटिंग सीजन के लिए सरकार ने चने का MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. यानी मौजूदा मंडी भाव MSP से करीब 17 फीसदी ज्यादा है. सरकार के मुताबिक, रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा. साथ ही इससे किसानों को फसल विविधीकरण के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा.
मंडियों में चने के बढ़े हुए भाव को देखते हुए कारोबारियों ने सरकार से बफर स्टॉक में रखे करीब 20 लाख टन चने को बाजार में उतारने की मांग की है. यह चना सरकारी एजेंसियों नाफेड और NCCF के पास है. कारोबारियों का कहना है कि बफर स्टॉक जारी होने से बाजार में चने की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में कमी आ सकती है. सरसों और चने की बुवाई अक्टूबर के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है. ऐसे में बाजार में इन फसलों की कीमतों और किसानों की बुवाई के फैसले पर नजर बनी हुई है.
सरकार ने प्रमुख रबी फसल गेहूं के MSP में सिर्फ 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है. 2026-27 सीजन के लिए गेहूं का MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले सीजन के 2,585 रुपये से करीब 1 फीसदी कम बढ़ोतरी है. कहा जा रहा है कि गेहूं के MSP में मामूली बढ़ोतरी की एक वजह सरकारी गोदामों में अनाज का पर्याप्त स्टॉक है. इसके अलावा सरकार का जोर तिलहन और दलहन का उत्पादन बढ़ाने पर भी है. हालांकि, किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने MSP में इस मामूली बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं. संगठन ने कहा है कि किसानों को मिलने वाले लाभकारी दाम में बढ़ोतरी काफी कम है.