अन्नदाता से ऊर्जा उत्पादक तक! खेत से पेट्रोल का विकल्प तैयार करें किसान, एथेनॉल पर गडकरी का बयान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Agricultural Waste Fuel: किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए खेती को सिर्फ अनाज और सब्जियों तक सीमित रखने के बजाय ऊर्जा के क्षेत्र से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार के पटना में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, किसान आने वाले समय में एथेनॉल, बायो-सीएनजी, विमान ईंधन और बायो-बिटुमिन जैसे ईंधन बनाने में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. इससे किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं और देश की पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी घट सकती है.

गडकरी ने कहा कि, भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोलियम, डीजल और गैस बाहर से खरीदता है. ऐसे में खेती को ऊर्जा से जोड़ना किसानों और देश दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है. उनका कहना है कि, किसान सिर्फ खाद्य उत्पादक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और ईंधन के उत्पादक भी बन सकते हैं. उन्होंने एथेनॉल को इसका एक बड़ा उदाहरण बताया. पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का काम बढ़ने से मक्का और दूसरी कृषि उपज के लिए नया बाजार तैयार हो रहा है.

गडकरी ने बताया कि, सरकार ने जब मक्का से एथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया तो शुरुआत में इसका विरोध भी हुआ था. लेकिन बाद में मक्का और टूटे चावल से एथेनॉल का उत्पादन बढ़ा. उनके मुताबिक, इससे बिहार और उत्तर प्रदेश में मक्का की कीमत करीब 2,628 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची, जो पहले लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थी. उन्होंने दावा किया कि इस बदलाव से दोनों राज्यों के किसानों तक करीब 45,000 करोड़ रुपये पहुंचे.

नितिन गडकरी ने बताया कि एथेनॉल से बने ईंधन की कीमत करीब 70 से 75 रुपये प्रति लीटर है, जबकि पेट्रोल की कीमत करीब 120 रुपये प्रति लीटर है. उन्होंने कहा कि ज्यादा एथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर भी काम हो रहा है. टोयोटा, हुंडई, टाटा, महिंद्रा और मर्सिडीज जैसी कंपनियां ऐसी गाड़ियां बनाने पर काम कर रही हैं. वहीं बजाज, टीवीएस, हीरो और होंडा जैसी दोपहिया कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल ला चुकी हैं.

गडकरी ने नेपियर घास को भी ऊर्जा का एक संभावित सोर्स बताया. उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर नेपियर घास उगाकर उससे गैस या ईंधन बनाया जा सकता है. इस ईंधन का इस्तेमाल ट्रक, बस, कार और दोपहिया वाहनों में किया जा सकता है. इसके अलावा उन्होंने फसल के बचे हुए हिस्से से बायो-बिटुमिन बनाने की बात भी कही. उनके मुताबिक, धान के पुआल से बनाया गया बायो-बिटुमिन जबलपुर-नागपुर हाईवे के एक हिस्से में सड़क बनाने के काम आ चुका है.

गडकरी ने बताया कि कृषि कचरे से बायो-एविएशन फ्यूल बनाने की दिशा में भी काम हो रहा है. उन्होंने देहरादून से स्पाइसजेट की ऐसी उड़ान में सफर करने का जिक्र किया, जिसमें बायो-एविएशन फ्यूल का इस्तेमाल किया गया था. उनका कहना है कि खेती को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ने पर किसानों को अपनी उपज और कृषि अवशेष बेचने के लिए नए बाजार मिल सकते हैं. साथ ही, इससे देश में ईंधन की जरूरत पूरी करने में घरेलू स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है.

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