मछली पालन के साथ मोती की खेती से होगी मोटी कमाई, 40 फीसदी सब्सिडी मिलेगी.. ऐसे करें आवेदन, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Pearl Farming: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए मोती पालन से जुड़ी नई योजना शुरू की गई है. पारंपरिक मछली पालन के साथ अब तालाब में मोती की खेती का विकल्प भी मिलेगा. उत्तर प्रदेश सरकार और मत्स्य विभाग के अनुसार, प्रदेश में पहली बार शुरू की जा रही इस पहल के तहत इच्छुक किसानों को मोती पालन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा और परियोजना लागत पर 40 फीसदी तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी. योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को 5 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा.

उत्तर प्रदेश सरकार और मत्स्य विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पहली बार मोती पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना शुरू की गई है. इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प उपलब्ध कराना है. योजना के तहत मोती पालन में रुचि रखने वाले किसान मत्स्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आवेदन के बाद चयनित किसानों को मोती पालन की तकनीकी जानकारी दी जाएगी और उन्हें प्रशिक्षण के साथ पालन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा.

योजना के तहत मोती पालन से जुड़ी परियोजनाओं पर किसानों को 40 फीसदी तक अनुदान दिया जाएगा. इसके लिए अलग-अलग श्रेणियों में योजनाएं निर्धारित की गई हैं. हालांकि, मोती पालन को लेकर उत्तर प्रदेश और मऊ में अभी शुरुआती स्तर पर काम हो रहा है. इसी वजह से पहले वर्ष किसानों को सीधे बड़े स्तर पर उत्पादन कराने के बजाय प्रशिक्षण और प्रायोगिक जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है. इससे किसानों को मोती पालन  की पूरी प्रक्रिया समझने और तकनीकी जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी.

मोती पालन सीखें, सब्सिडी पाएं और तालाब से अतिरिक्त कमाई करें. (Photo Credit-Canva)

मोती पालन योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मत्स्य विभाग के आधिकारिक पोर्टल  पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन करते समय किसान को अपनी फोटो, पहचान पत्र, बैंक पासबुक और जिस तालाब में मोती पालन किया जाना है, उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास अपना तालाब होना महत्वपूर्ण है. आवेदन करने से पहले किसान सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें, ताकि ऑनलाइन पंजीकरण  के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो. आवेदन और योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान मत्स्य विभाग के आधिकारिक पोर्टल और विभागीय माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन पूरा करने के बाद किसान अपने पंजीकरण और आवेदन की स्थिति भी विभागीय पोर्टल के माध्यम से जांच सकते हैं.

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