एग्रीवेट: Women Farmers Conference: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भारतीय किसान संघ (BKS) की ओर से अखिल भारतीय महिला किसान सम्मेलन आयोजित किया गया. देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में महिला किसान और कृषि मजदूर इसमें शामिल हुए. सम्मेलन में खेती में महिलाओं की भूमिका, जमीन पर उनके अधिकार, जैविक खेती, पारंपरिक बीजों को बचाने और गांवों में रोजगार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में महिला किसानों ने अपने खेती के अनुभव साझा किए और इस बात पर जोर दिया कि खेती में उनके काम को सिर्फ परिवार की मदद के तौर पर नहीं, बल्कि किसान के रूप में पहचान मिलनी चाहिए.
PTI के अनुसार, सम्मेलन में महिला किसानों के सामने आने वाली एक बड़ी समस्या जमीन के मालिकाना हक को लेकर बताई गई. BKS की अखिल भारतीय महिला संयोजक मंजू दीक्षित ने कहा कि जब किसान की बात होती है तो अक्सर लोगों के सामने पुरुष किसान की तस्वीर आती है. जबकि खेत में बुवाई से लेकर फसल की देखभाल और कटाई तक महिलाएं भी लगातार काम करती हैं. उनका कहना था कि खेती में महिलाओं की भागीदारी काफी ज्यादा है, लेकिन जमीन के मालिकाना हक में उनकी हिस्सेदारी कम है. ऐसे में महिला किसानों को जमीन से जुड़े अधिकारों के साथ खेती से जुड़ी नीतियां बनाने में भी जगह मिलने की जरूरत है.
सम्मेलन में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, कश्मीर और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की महिला किसान शामिल हुईं. संगठन के मुताबिक अलग-अलग राज्यों और गांवों से हजारों महिला किसान और कृषि मजदूर कार्यक्रम में पहुंचे. BKS के अनुसार संगठन से जुड़े करीब 42 लाख सदस्यों में लगभग 7 लाख महिलाएं कार्यकर्ता के तौर पर जुड़ी हैं. ये महिलाएं राज्य से लेकर जिला, तहसील और गांव स्तर तक संगठन के साथ काम करती हैं.
सम्मेलन में खेती के तरीकों पर भी चर्चा हुई. इसमें जैविक खेती को बढ़ावा देने, पारंपरिक बीजों को बचाने, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कामों पर जोर दिया गया. महिला किसानों से कहा गया कि वे अपने पारंपरिक बीजों और खेती के अनुभवों को आगे साझा करें. इसके साथ मिट्टी की सेहत और बदलते मौसम के बीच खेती को टिकाऊ बनाने पर भी ध्यान देने की बात कही गई.
महिला किसानों के लिए खेती के साथ पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे काम कमाई के अतिरिक्त रास्ते बन सकते हैं. सम्मेलन में इन क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं को सम्मानित भी किया गया. गाय आधारित खेती, जैविक खेती, बीज संरक्षण, पशुपालन, कृषि व्यापार और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने वाली महिला किसानों को सम्मान मिला. अलग-अलग राज्यों से आई महिलाओं ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोक गीत और नृत्य भी प्रस्तुत किए.
BKS के राष्ट्रीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत के लक्ष्य के लिए जैविक और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है. उन्होंने पौष्टिक भोजन और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर जोर दिया. वहीं, आयोजन सचिव दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि आत्मनिर्भर महिला किसानों को पहचान मिलने से गांव और परिवार को मजबूती मिल सकती है.
यह सम्मेलन 2026 को महिला किसानों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाए जाने के संदर्भ में आयोजित किया गया. सम्मेलन में हुई चर्चा का मुख्य फोकस यही रहा कि खेती में महिलाओं के योगदान को पहचान मिले और उन्हें जमीन, खेती और उससे जुड़ी नीतियों में भी उचित अधिकार और जगह मिल सके.