एग्रीवेट: 02 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र ने यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना में दलहन-तिलहन की MSP खरीद को दी मंजूरी, ₹5,547.99 करोड़ होंगे खर्च – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 30 सितंबर को दी गई।
खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए कुल 7.11 लाख टन दलहन-तिलहन की खरीद होगी, जिसमें 5.21 लाख टन दलहन और 1.90 लाख टन तिलहन शामिल है। इस पर कुल ₹5,547.99 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह फैसला उस वक्त आया है जब खरीफ की फसल कटकर मंडियों में पहुंचने लगी है और कई जगह दलहन-तिलहन के भाव MSP के आसपास या उससे नीचे चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी खरीद किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा ₹3,992.57 करोड़ की खरीद होगी। इसमें तुअर यानी अरहर की 4.66 लाख मीट्रिक टन खरीद पर ₹3,937.70 करोड़ और मूंग की 6,250 मीट्रिक टन खरीद पर ₹54.87 करोड़ खर्च होंगे।
कर्नाटक में ₹1,107 करोड़ की खरीद मंजूर हुई है। इसमें सोयाबीन की 1.15 लाख टन (₹659.27 करोड़), मूंग की 38,250 टन (₹335.83 करोड़) और सूरजमुखी बीज की 13,413 टन (₹111.90 करोड़) खरीद शामिल है।
तेलंगाना में ₹448.42 करोड़ की खरीद होगी। यहां सोयाबीन की 62,000 टन खरीद पर ₹353.90 करोड़ और मूंग की 10,766 टन खरीद पर ₹94.52 करोड़ खर्च होंगे।
मूल्य समर्थन योजना के तहत यह खरीद उस समय होती है जब बाजार में फसल का भाव MSP से नीचे गिर जाता है। इससे किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम तय मूल्य मिलना सुनिश्चित होता है और भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में जाता है, ताकि बिचौलियों की भूमिका कम से कम रहे।
यह खरीद राज्य की नामित खरीद एजेंसियों के माध्यम से होगी, जैसा मूल्य समर्थन योजना की मौजूदा प्रक्रिया में होता रहा है। आम तौर पर नेफेड और राज्य की सहकारी समितियां इस खरीद को ज़मीन पर उतारती हैं।
हालांकि पंजीयन की विस्तृत तारीखें और प्रक्रिया अभी राज्यवार अलग से जारी होनी है, इसलिए इच्छुक किसानों को अपने जिले की कृषि विपणन एजेंसी, मंडी समिति या सहकारी समिति से संपर्क में रहना चाहिए और वहां लगने वाले दस्तावेज़ों की जानकारी पहले से ले लेनी चाहिए।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक यह मंजूरी 30 सितंबर को दी गई है, और राज्यवार राशि व मात्रा का पूरा ब्योरा मंत्रालय के बयान में दर्ज है।
पिछले कुछ वर्षों में भी केंद्र सरकार समय-समय पर अलग-अलग राज्यों के लिए इस तरह की मंजूरियां देती रही है, खासकर उन इलाकों में जहां दलहन-तिलहन का बड़ा उत्पादन होता है और बाजार के भाव में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है।
मूल्य समर्थन योजना केंद्र और राज्य सरकार की साझा जिम्मेदारी होती है, जिसमें खरीद की मंजूरी केंद्र देता है जबकि जमीनी स्तर पर खरीद केंद्र खोलना, तुड़ाई की गुणवत्ता जांचना और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करना राज्य सरकार और उनकी एजेंसियों के जिम्मे होता है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में खरीद शुरू होने की तारीखें भी अलग-अलग हो सकती हैं।
तीन राज्यों के लिए यह मंजूरी ऐसे समय आई है जब खरीफ सीजन की दलहन-तिलहन फसलें मंडियों में आना शुरू ही हुई हैं। किसान संगठनों का कहना रहा है कि अगर सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं होती, तो किसानों को मजबूरी में व्यापारियों को कम भाव पर उपज बेचनी पड़ती है, इसलिए इस तरह की मंजूरी समय पर आना अहम माना जाता है।