एग्रीवेट: 07 अक्टूबर 2026, भोपाल: एमएससी-पीएचडी के बाद सीधी के किसान ने खेती को बनाया करियर, अब 1 एकड़ से 15 लाख तक हो रही कमाई – मध्यप्रदेश के सीधी जिले के ग्राम मनकीसर, विकासखंड रामपुर नैकिन निवासी डॉ. विपिन शुक्ला ने कृषि में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद नौकरी या कॉर्पोरेट क्षेत्र को प्राथमिकता देने के बजाय खेती को अपना करियर और आय का प्रमुख स्रोत बनाया। एमएससी और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय उद्यानिकी फसलों की उन्नत एवं संरक्षित खेती को अपनाया। आधुनिक तकनीक और विभागीय योजनाओं के सहयोग से उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया है।
डॉ. विपिन शुक्ला ने खेती की शुरुआत सब्जी, फल और फूलों की फसलों से की। धीरे-धीरे उन्होंने खेती को मिश्रित खेती का स्वरूप दिया। इससे अलग-अलग फसलों से अलग-अलग समय पर आय प्राप्त होने लगी। साथ ही किसी एक फसल में नुकसान होने पर उसका प्रभाव कम करने में भी मदद मिली।
डॉ. शुक्ला के अनुसार आधुनिक खेती की शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं। उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्र से मिले मार्गदर्शन से उन्हें इन चुनौतियों से निपटने में मदद मिली। उन्होंने उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के माध्यम से ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, शेडनेट हाउस और कृषि यंत्रीकरण जैसी सुविधाओं का लाभ लिया। इन योजनाओं में पात्रतानुसार लगभग 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से आधुनिक खेती में निवेश करना आसान हुआ।
शेडनेट हाउस के माध्यम से संरक्षित खेती अपनाने से फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि हुई। डॉ. शुक्ला के अनुसार संरक्षित खेती में सामान्य परिस्थितियों की तुलना में उत्पादन लगभग दोगुना तक प्राप्त हो जाता है।
डॉ. शुक्ला वर्तमान में शेडनेट हाउस सहित मिश्रित खेती में शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा, गेंदा, गोभी सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। उनके अनुसार इन फसलों की खेती में लगभग 2 से 5 लाख रुपये प्रति एकड़ तक लागत आती है, जबकि बेहतर उत्पादन और बाजार प्रबंधन के आधार पर 10 से 15 लाख रुपये प्रति एकड़ तक कुल आय प्राप्त हो जाती है। आधुनिक तकनीकों और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लेने से उनकी कृषि आय में पहले की तुलना में लगभग चार गुना तक वृद्धि हुई है।
डॉ. शुक्ला का कहना है कि खेती को केवल परंपरागत कार्य मानने के बजाय वैज्ञानिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और बाजार की मांग के अनुरूप व्यवसाय के रूप में किया जाए तो यह युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकती है।
उन्होंने किसानों से उद्यानिकी विभाग और कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की। उनके अनुसार ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, संरक्षित खेती और यंत्रीकरण जैसी सुविधाएं खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ उत्पादन और आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
डॉ. शुक्ला ने खेती को आगे बढ़ाने में सहयोग और मार्गदर्शन देने के लिए उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र तथा विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवा आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ कृषि को करियर बनाएं तो खेती आजीविका के साथ लाभकारी व्यवसाय का माध्यम भी बन सकती है।