एग्रीवेट: 02 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: रबी फसलों की MSP में बढ़ोतरी: कुसुम में सबसे ज्यादा ₹675, गेहूं पर ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़त – केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। यह फैसला 30 सितंबर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
अक्टूबर-नवंबर में बुवाई होने वाली इन्हीं रबी फसलों पर आने वाले सीजन में नई दरें लागू होंगी। किसानों के लिहाज से यह फैसला ठीक उस वक्त आया है जब देश भर में रबी की बुवाई की तैयारियां चल रही हैं और बीज, खाद का इंतजाम किया जा रहा है।
इस बार की बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा कुसुम (सैफ्लावर) और मसूर उगाने वाले किसानों को मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि किसानों की उत्पादन लागत को ध्यान में रखकर तय की गई है।
मंत्रिमंडल ने गेहूं का MSP ₹2,585 से बढ़ाकर ₹2,610 प्रति क्विंटल कर दिया है, यानी ₹25 की बढ़ोतरी। जौ का भाव ₹2,150 से ₹2,286 प्रति क्विंटल, यानी ₹136 बढ़ा है।
चने का MSP ₹5,875 से ₹5,958 प्रति क्विंटल पहुंच गया है, यानी ₹83 की वृद्धि। मसूर पर सबसे बड़ी छलांगों में एक दर्ज हुई है, इसका भाव ₹7,000 से ₹7,390 प्रति क्विंटल यानी ₹390 बढ़ा है।
सरसों व तोरिया का MSP ₹6,200 से ₹6,613 प्रति क्विंटल, यानी ₹413 बढ़ाया गया है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम में हुई है, जिसका भाव ₹6,540 से ₹7,215 प्रति क्विंटल, यानी पूरे ₹675 बढ़ गया है।
सरकार के मुताबिक नई दरें उत्पादन लागत से काफी ऊपर हैं। गेहूं पर किसानों को लागत से 106 प्रतिशत ज्यादा, सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चने पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत का मार्जिन मिलेगा। यह बजट 2018-19 में तय की गई उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत MSP लागत का कम से कम 1.5 गुना रखने का वादा किया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस बढ़ोतरी से किसानों को कुल मिलाकर अनुमानित ₹90,962 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होने की उम्मीद है, हालांकि यह आंकड़ा अभी किसी सरकारी दस्तावेज़ में सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं दिया गया है, इसलिए इसे अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फैसले के पीछे की सोच साफ की। उनके मुताबिक, “किसानों को लागत पर कम से कम 50 फीसदी लाभ देने की नीति के तहत MSP तय की है।”
कुसुम की फसल को लेकर मंत्री ने अलग से तर्क दिया। उनका कहना था, “कुसुम ऐसी फसल है, जो कम पानी और अपेक्षाकृत कम उपजाऊ जमीन में भी उगाई जा सकती है।” इसी वजह से सरकार दलहन-तिलहन और कम पानी वाले इलाकों में इसकी बुवाई बढ़ाना चाहती है।
देश अभी भी बड़ी मात्रा में खाद्य तेल और दलहन का आयात करता है, इसलिए सरकार लगातार किसानों को तिलहन और दलहन फसलों की तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। MSP में बढ़ोतरी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
वास्तविक खरीद अगले साल अप्रैल-मई में रबी की कटाई के बाद शुरू होगी, जब किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों या मंडियों में लेकर पहुंचेंगे।