महंगाई आकलन के बिना फसलों का MSP बढ़ाने का दावा मजाक, SKM और BKU नेताओं की खरी-खरी—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: केंद्र सरकार ने आगामी रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं समेत 6 फसलों के लिए नए एमएसपी की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. इसके तहत गेहूं का एमएसपी केविल 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है और चना के लिए मात्र 83 रुपये बढ़ाए गए हैं. जबकि, यह दोनों फसलें रबी सीजन में प्रमुखता से बोई जाती हैं. वहीं, कुसुम के लिए सर्वाधिक बढ़ोत्तरी पर किसानों नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है. संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने बयान जारी कर सरकार के एमएसपी बढ़ोत्तरी को मजाक बताया है और किसानों के साथ नाइंसाफी करार दिया है.

केंद्र सरकार ने कहा कि सीएसीपी की सिफारिशों के आधार पर रबी सीजन 2027-28 के लिए 6 प्रमुख फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की बढ़ोत्तरी की गई है. इसके तहत गेहूं का भाव 25 रुपये बढ़ाकर 2610 रुपये किया गया है. इसी तरह जौ के जौ का एमएसपी 136 रुपये बढ़ाकर 2286 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है. चना का 83 रुपये बढ़ाते हुए 5958 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. मसूर का एमएसपी 7,390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है और इसमें 390 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. रेपसीड और सरसों का एमएसपी 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें पिछले सीजन के मुकाबले 413 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. कुसुम का एमएसपी सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़ाकर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है.

संयुक्त किसान मोर्चा के घटक दल अखिल भारतीय किसान महासभा ने केंद्र की ओर से 2027-28 की रबी फसल के लिए घोषित मूल्य बढ़ोतरी को घाटे की खेती के लिए मजबूर भारत के किसानों के साथ एक मजाक करार दिया है. एक प्रेस बयान में अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कृषि विशेषज्ञ कामरेड डॉ. सतनाम सिंह अजनाला ने भारत सरकार की ओर से रबी फसलों के लिए घोषित कीमतों को अनुचित बताया है. खास तौर पर गेहूं जो मुख्य रबी फसल है.

कृषि विशेषज्ञ डॉ. सतनाम सिंह अजनाला ने कहा कि गेहूं की कीमत में सिर्फ 25 रुपये यानी 1 फीसदी से भी कम की बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने कहा कि महंगाई 8 फीसदी बढ़ गई है और खेती में लगने वाली लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है. उन्होंने डॉ. स्वामीनाथन फॉर्मूले के आधार पर गेहूं उत्पादन की कुल लागत का हिसाब लगाया, जो 3,284 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है. डॉ. अजनाला ने कहा कि दूसरी फसलों का भी यही हाल है. उन्होंने बताया कि देश के किसानों पर 19 लाख करोड़ रुपये का जो कर्ज है, वह पिछले 10-15 सालों में इसलिए जमा हुआ है क्योंकि उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिला, और इस कर्ज को तुरंत माफ किया जाना चाहिए.

सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसान पर लगातार कर्जा बढ़ता जा रहा है. एमएसपी की घोषणा में गेहूं की तुलना में दलहन और तिलहन को अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी दी गई है. सरकार से भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक सवाल करती है कि फसलों का मूल्य घोषित करते समय लागत और उसकी प्रामाणिक जानकारी भी घोषित करे. हम

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