विदेशों में छाया भारतीय पशु उत्पाद! 44 फीसदी बढ़ा कारोबार.. किसानों-पशुपालकों को मिलेगा फायदा – एग्रीवेट

atulpradhan
6 Min Read

एग्रीवेट: Livestock Product Export: भारत के पशु उत्पादों के निर्यात में चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. अप्रैल से अगस्त के बीच मांस, डेयरी और पोल्ट्री से जुड़े उत्पादों का निर्यात 44 फीसदी बढ़कर 3.132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया. पिछले वित्त वर्ष में इसी दौरान में यह कारोबार करीब 2.177 अरब डॉलर था. विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को इस तेजी की बड़ी वजह माना जा रहा है. खासतौर पर भारतीय भैंसे के मांस, घी और स्किम्ड मिल्क पाउडर की मांग ने निर्यात को आगे बढ़ाने में मदद की है. वाणिज्य मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात 37.1 फीसदी बढ़ा. इस महीने करीब 694 मिलियन डॉलर के उत्पाद विदेश भेजे गए, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 506 मिलियन डॉलर था. इससे साफ है कि भारतीय पशु उत्पादों की मांग केवल कुछ महीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी बाजारों में इनकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है. निर्यात बढ़ने में भारतीय भैंसे के मांस की भूमिका काफी अहम रही है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, वियतनाम, मलेशिया और दूसरे विदेशी बाजारों में इसकी मांग बढ़ी है. इसके अलावा भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के कई बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. वियतनाम, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया और सऊदी अरब जैसे देशों में भारतीय पशु उत्पादों की मांग बढ़ना इसी बदलाव का संकेत है. डेयरी क्षेत्र में घी और स्किम्ड मिल्क पाउडर यानी सूखे दूध के निर्यात ने भी कुल कारोबार बढ़ाने में अहम योगदान दिया है. विदेशी बाजारों में भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने से इस क्षेत्र के लिए नए बाजार खुल रहे हैं. वहीं, पोल्ट्री क्षेत्र में फिलहाल भारत से मुख्य रूप से अंडे और अंडे का पाउडर विदेश भेजा जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, देश में उत्पादन लागत ज्यादा होने की वजह से चिकन मीट का निर्यात अभी उतना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है. पशु उत्पादों के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी से किसानों, पशुपालकों और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर बन सकते हैं. अगर विदेशी मांग इसी तरह बनी रहती है, तो दूध, डेयरी उत्पाद, अंडे और दूसरे पशु उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ सकती है. जानकारों का कहना है कि भारत को कुछ चुनिंदा उत्पादों तक सीमित रहने के बजाय निर्यात की सूची बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. साथ ही, विदेशी खरीदारों की क्वालिटी और सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना भी जरूरी होगा. इससे भारतीय उत्पादों को नए बाजारों में जगह बनाने में मदद मिल सकती है. पशुधन से जुड़े उत्पादों के निर्यात में तेजी कोई नई बात नहीं है. वित्त वर्ष 2025-26 में भी इस कारोबार में 22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. उस दौरान कुल निर्यात 5.096 अरब डॉलर से बढ़कर 6.215 अरब डॉलर हो गया था. अब चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में 44 फीसदी की बढ़ोतरी ने इस सेक्टर की रफ्तार को और तेज कर दिया है. अगर विदेशी बाजारों में मांग बनी रहती है और भारतीय उत्पाद क्वालिटी के मानकों पर खरे उतरते हैं, तो किसानों और पशुपालकों के लिए निर्यात के जरिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं.

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *