एग्रीवेट: कर्नाटक में प्याज की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. राज्य के कई इलाकों में सूखे के कारण प्याज की फसल को भारी नुकसान हुआ है. कर्नाटक के बागवानी विभाग (KSDH) के मुताबिक, राज्य के 124 तालुकों में 62,985 हेक्टेयर प्याज की फसल को 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है. फिलहाल थोक बाजार में प्याज 50-55 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. वहीं, खुदरा बाजार में इसकी कीमत 65-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, KSDH के अधिकारियों का कहना है कि 2026-27 खरीफ सीजन में राज्य में 1,41,256 हेक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई है. सरकार ने 1,50,000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा था. यानी लक्ष्य के मुकाबले करीब 94 फीसदी क्षेत्र में बुवाई हुई है. अधिकारियों का कहना है कि राज्य के 124 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है. KSDH और कर्नाटक स्टेट नेचुरल डिजास्टर मॉनिटरिंग सेंटर (KSNDMC) के संयुक्त सर्वे में 62,985 हेक्टेयर फसल को 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान की बात सामने आई है. इसके अलावा 22 सितंबर को 53 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है. इन इलाकों में प्याज की फसल को हुए नुकसान का सर्वे अभी जारी है. ऐसे में फसल नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
कर्नाटक में कम बारिश के कारण प्याज की फसल को नुकसान हुआ है. ऐसे में आने वाले दिनों में प्याज की कीमतें और बढ़ सकती हैं. बागवानी विभाग के अधिकारी के मुताबिक, खरीफ सीजन में 94 फीसदी क्षेत्र में प्याज की बुवाई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 6 फीसदी कम है. बुवाई का आंकड़ा ठीक है, लेकिन बारिश की कमी के कारण अच्छी पैदावार की उम्मीद कम है. अधिकारी ने कहा कि अगर राज्य में प्याज की पैदावार कम होती है और मांग बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. स्थानीय उत्पादन कम होने पर कर्नाटक के बाजारों में महाराष्ट्र से प्याज की सप्लाई बढ़ जाती है.
कर्नाटक राज्य रैयत संघ (KRRS) के मानद अध्यक्ष चमारसा मालिपाटिल ने कहा कि राज्य में प्याज की खेती मुख्य रूप से विजयपुरा, बागलकोट और चित्रदुर्ग जिलों के अलावा दक्षिण कर्नाटक के कुछ हिस्सों में होती है. उन्होंने कहा कि प्याज की फसल के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है. काली मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए करीब 20 दिन में एक बार, जबकि लाल मिट्टी में करीब 10 दिन में एक बार सिंचाई की जरूरत होती है. मालिपाटिल के मुताबिक, पिछले तीन साल से प्याज के दाम काफी कम रहे हैं. किसानों को उचित मुनाफा नहीं मिला. उस दौरान प्याज का भाव करीब 400-500 रुपये प्रति क्विंटल यानी 10-15 रुपये किलो रहा. कम दाम के कारण उत्तर कर्नाटक के कुछ किसानों ने प्याज की खेती करना ही छोड़ दिया. इससे इस साल उत्पादन घटने की स्थिति में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है.
बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च के वरिष्ठ वैज्ञानिक बीआर रघु के मुताबिक, कर्नाटक में प्याज की खेती का बड़ा हिस्सा खरीफ सीजन में होता है. यह फसल बारिश वाले इलाकों में भी अच्छी तरह उगाई जा सकती है. इसकी बुवाई मई में शुरू होती है और सितंबर-अक्टूबर में फसल तैयार होती है. उन्होंने कहा कि इस साल कम बारिश और फसल को हुए नुकसान के कारण प्याज की आवक में देरी हो सकती है. देशभर में प्याज की कीमतों को स्थिर रखने के लिए कर्नाटक की अच्छी खरीफ फसल काफी महत्वपूर्ण है.