एग्रीवेट: Rabi Season 2027-28: रबी सीजन 2027-28 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं समेत छह प्रमुख फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP बढ़ा दी है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम देना और साथ ही देश में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाना है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने MSP में बढ़ोतरी की जानकारी देते हुए बताया कि कुसुम की MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है.
रबी की छह फसलों में कुसुम की MSP सबसे ज्यादा बढ़ाई गई है. इसके अलावा रेपसीड-सरसों, मसूर, जौ, चना और गेहूं की MSP में भी बढ़ोतरी हुई है. फसल के हिसाब से देखें तो कुसुम की MSP 675 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी है. रेपसीड-सरसों की MSP में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चने में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. कृषि मंत्री के मुताबिक, MSP तय करते समय किसानों की लागत को ध्यान में रखा गया है. सरकार की नीति के तहत किसानों को लागत के ऊपर कम से कम 50 फीसदी लाभ देने की कोशिश की गई है. कुछ फसलों में यह अंतर 50 फीसदी से भी ज्यादा है.
सरकार का फोकस सिर्फ गेहूं की खेती तक सीमित नहीं है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में गेहूं का उत्पादन और उत्पादकता लगातार बढ़ रही है और फिलहाल गेहूं का पर्याप्त भंडार भी है. ऐसे में अब किसानों को दूसरी जरूरी फसलों की ओर ले जाने पर जोर दिया जा रहा है. खासकर दलहन की खेती बढ़ाने की जरूरत बताई गई है. देश में दालों की मांग का कुछ हिस्सा अभी दूसरे देशों से आयात करके पूरा करना पड़ता है. सरकार चाहती है कि देश में ही दालों का उत्पादन बढ़े, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके. इसके लिए दलहन मिशन के जरिए किसानों को अलग-अलग तरह की मदद दी जा रही है.
कृषि मंत्री ने धान की कटाई के बाद खाली रह जाने वाले खेतों को भी इस योजना से जोड़ने की बात कही है. ऐसे खेतों में दलहन और तिलहन की फसल लेने से किसान एक ही साल में अतिरिक्त फसल पैदा कर सकते हैं. इससे उनकी कमाई बढ़ाने का मौका मिलेगा और देश में दाल और खाद्य तेल का उत्पादन भी बढ़ सकता है. मसूर पर भी सरकार का खास ध्यान है. देश में मसूर की जरूरत का एक हिस्सा आयात से पूरा होता है. इसलिए किसानों को मसूर की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
रेपसीड-सरसों को लेकर भी सरकार का बड़ा लक्ष्य है. देश में खाद्य तेल की जरूरत का एक हिस्सा आयात से पूरा होता है. ऐसे में सरसों जैसी तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाकर बाहर से आने वाले खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. वहीं, कुसुम को लेकर सरकार का मानना है कि यह कम पानी में भी उगाई जा सकती है. यह अपेक्षाकृत कम उपजाऊ जमीन में भी अच्छी तरह ली जा सकती है और खासकर आदिवासी इलाकों में इसकी खेती की संभावनाएं हैं. इसी वजह से इसकी MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है.
रबी की खेती को लेकर सरकार ने पानी की उपलब्धता पर भी खास ध्यान दिया है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के हर हिस्से में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं है. कई जगह पर्याप्त बारिश हुई है, जबकि कुछ इलाकों में पानी की कमी रही है. ऐसे में सभी राज्यों और जिलों के लिए एक जैसा फसल प्लान लागू नहीं किया जा सकता. कम बारिश वाले इलाकों में मिट्टी में मौजूद नमी, पानी की उपलब्धता और स्थानीय परिस्थितियों को देखकर फसल चुनने पर जोर दिया जा रहा है. जहां जलाशयों में पानी कम है, वहां ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों से बचने की सलाह दी गई है. सरकार ने ऐसे क्षेत्रों के लिए कंटिजेंसी प्लान भी तैयार किया है, ताकि पानी की कमी के बावजूद रबी की खेती पर ज्यादा असर न पड़े.