एग्रीवेट: सूखे से जूझ रहे महाराष्ट्र के किसानों से कर्ज वसूली पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. महाराष्ट्र सरकार के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बैंकों को निर्देश दिया है कि उनके कर्मचारी कर्ज वसूली के लिए किसानों के घर नहीं जाएं. फसल कर्ज की किस्तों को लेने से मना किया गया है. वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक से भी लेटर जारी कराने के संबंध में कृषि और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं.
महाराष्ट्र सरकार राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली सूखा राहत मंत्रिमंडलीय उपसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में शहरी क्षेत्रों में 10 फीसदी जल कटौती लागू करने और बचाए गए पानी को अगले साल जून तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही सूखा पीड़ित इलाकों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की समीक्षा की गई है. पशुओं के लिए पीने के पानी और चारे की व्यवस्था के निर्देश भी दिए हैं. इसके लिए कृषि, उद्यान और राजस्व विभाग की टीमों को लगाया गया है.
महाराष्ट्र सरकार ने बैंकों को किसानों से कर्ज वसूली के लिए उनके घर नहीं जाने का निर्देश दिया. महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बैंकों को निर्देश दिया है कि राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए वे किसानों के घर जाकर कर्ज वसूली नहीं करें. उन्होंने अधिकारियों से यह भी पता लगाने को कहा है कि क्या भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ऐसी वसूली प्रक्रिया को स्थगित करने के संबंध में कोई परिपत्र जारी कर सकता है?
महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक बयान में राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया जा रहा है. राज्य का कुल 74 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है. यहां पर कम बारिश की वजह से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. कहा गया है कि धाराशिव और बीड समेत कुछ अन्य जिलों में जुलाई से बारिश नहीं हुई है, जिससे फसलों, मवेशियों और किसानों एवं मजदूरों की रोजमर्रा की पानी की जरूरतों पर असर पड़ा है.
सूखे के चलते फसलें चौपट हो गई हैं. इससे किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. खरीफ सीजन में राज्य के किसानों ने सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी फसलें उगाई हैं. कई जिलों के किसानों ने बारिश की कमी के कारण फसल बर्बाद होने की शिकायत की है. इन जिलों में कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी काफी बढ़ गया है.